प्रयागराज : हत्या से करीब 20 दिन पहले प्रापर्टी डीलर विद्यासागर से एक शख्स ने 10 लाख रुपये मांगे थे। पैसा नहीं मिलने पर हत्या की धमकी भी दी गई थी। परिजनों ने पूछताछ में ऐसी ही कई जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस जांच की दिशा बदल गई है।

वर्चस्व की अदावत के बिंदु पर टिकी तफ्तीश

अब हत्याकांड की तफ्तीश शेरडीह गांव में वर्चस्व की अदावत के बिंदु पर टिक गई है। पुलिस को पता चला है कि वीरेंद्र उर्फ करिया की हत्या से कुछ दिन पहले विद्यासागर से रकम मांगी गई थी। विद्यासागर के नहीं मिलने पर उनके भाइयों ने पैसा मांगने पहुंचे युवकों की पिटाई की थी। इसके बाद ही उसे धमकी दी गई थी। जांच में यह बात भी सामने आई है कि विद्यासागर कई साल पहले एक व्यक्ति के साथ मिलकर प्रापर्टी डीलिंग का काम करता था। उस व्यक्ति का करीब 35 लाख रुपये गबन करके अपना काम शुरू किया और स्कार्पियो खरीदी थी।

जमानत न लेने पर हुआ था विवाद

हत्या से एक दिन पहले ही गांव की प्रधान सरस्वती देवी जेल से बाहर आई थी। उसकी जमानत न लेने पर भी विद्यासागर का किसी से विवाद हुआ था। इस बिंदु पर भी विवेचना की जा रही है। फिलहाल अब तक पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम शूटरों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

संतोष का ड्राइवर था अमरजीत

विद्यासागर हत्याकांड का चश्मदीद ड्राइवर अमरजीत पहले संतोष यादव की कार चलाता था। वीरेंद्र उर्फ करिया की हत्या के बाद जब संतोष जेल चला गया तो अमरजीत ने विद्यासागर का दामन पकड़ लिया। पुलिस का कहना है कि संतोष और विद्यासागर भी कभी एक साथ रहते थे। रंगदारी न देने पर डॉ.आरएन पटेल की क्लीनिक पर बमबाजी करने के मामले में दोनों गिरफ्तार हुए थे। सीओ आलोक मिश्रा का कहना है कि कुछ सुराग मिले हैं, जल्द ही मामले का राजफाश कर दिया जाएगा।

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