प्रयागराज, जागरण संवाददाता। क्‍या आपको पता है कि प्रयागराज जिले में इन दिनों प्‍लेटलेट्स की मांग बढ़ गई है। इसी की आड़ में जरूरतमंद लोगों को प्‍लेटलेट्स के नाम पर प्‍लाज्‍मा बेचने वाला गिरोह सक्रिय है। गिरोह के सदस्‍य मुंहमांगी कीमत पर इसे बेच रहे हैं। अपने मरीज की जान बचाने के लिए लोग इसे खरीद भी रहे हैं। हालांकि यह जानने की आवश्‍यकता भी है कि दलालों के माध्‍यम से पैक में जो दिया जा रहा है वह प्‍लेटलेट्स है या फिर नहीं, अगर नहीं तो उसे चढ़ाने के बाद मरीज की जान पर संकट भी हो सकता है। शहर में प्‍लेटलेट्स के नाम पर प्‍लाज्‍मा बेचने वाले गिरोह के कुछ सदस्‍य पिछले दिनों गिरफ्तार किए गए थे। इसलिए ब्‍लड बैंकों से ही इसे लेना सुरक्षित है।

डेंगू मरीजों की संख्‍या बढ़ने पर ब्‍लड बैंकों के आसपास गिरोह सक्रिय : इन दिनों प्रयागराज में डेंगू का प्रकोप है। डेंगू मरीजों में प्‍लेटलेट्स कम होने के कारण इसे मरीजों को चढ़ाया जाता है। इसीलिए प्‍लेटलेट्स की मांग बढ़ गई है। इसकी कमी भी है। इसका फायदा कुछ लोग उठा रहे हैं। गिरोह के सदस्‍य ब्‍लड बैंकों के आसपास सक्रिय हैं। खून के सौदागरों से लेकर अस्पतालों तक प्लेटलेट्स के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। दलालों से लिए जा रहे बैग में प्लेटलेट है या प्लाज्मा, यह भी किसी को ठीक से पता नहीं। इससे डेंगू के मरीजों की जान आफत में है तो तीमारदार ठगे जा रहे हैं।

डेंगू मरीज की मौत के बाद गिरोह के 10 सदस्‍य पकड़े गए थे : प्रश्न है कि कस्बों में संचालित प्राइवेट अस्पतालों में डेंगू मरीजों की प्लेटलेट्स बढ़ाने को चढ़ाया जा रहा खून का घटक कहीं प्लाज्मा तो नहीं ? पिछले दिनों डेंगू मरीज प्रदीप पांडेय की मौत और उसके बाद गिरोह के पकड़े गए 10 लोगों के बयान से स्थिति चिंताजनक है। झलवा के ग्लोबल हास्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में डेंगू पीड़ित मरीज प्रदीप पांडेय को प्लेटलेट की जगह मौसमी का जूस चढ़ाए जाने का आरोप लगा था। उसकी दूसरे अस्पताल में मौत हो गई थी। पुलिस द्वारा 10 लोगों के पकड़े जाने के बाद एक नया तथ्य उभरा है कि खून के दलाल बैग में प्लेटलेट के नाम पर प्लाज्मा भरकर ऊंचे दाम पर बेच रहे हैं।

ब्लड बैंक से मिलता है प्लाज्मा : किसी रक्तदाता के शरीर से लिए गए एक यूनिट खून का वजन 350 मिली होता है। प्रक्रियागत तरीके से 200 मिली खून अलग कर लिया जाता है। 100 मिली प्लाज्मा बन जाता है और 50 मिली प्लेटलेट्स बनता है। यही 50 मिली प्लेटलेट्स जरूरतमंद को दी जाती है। प्लाज्मा और खून किसी अन्य जरूरतमंद के लिए सुरक्षित रखा जाता है। गिरोह इसी संग्रहित प्लाज्मा से खेल करता है।

क्‍या है प्‍लेटलेट्स व प्‍लामा : मानव शरीर में प्लाज्मा और प्लेटलेट्स के अलग-अलग कार्य हैं। प्रयागराज के बेली अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डा. मंसूर अहमद कहते हैं कि प्लेटलेट और प्लाज्मा किसे और कब चढ़ना है, यह बीमारी की स्थितियों पर निर्भर करता है। डेंगू में प्लेटलेट्स घटने पर इसे ही चढ़ाया जाता है, प्लाज्मा नहीं। जबकि प्लाज्मा तब दिया जाता है जब रक्तस्राव का खतरा रहता है।

बड़े स्तर पर होता है खेल : प्लेटलेट्स और खून के काले व्यापार में दलालों से लेकर अस्पताल संचालकों, अप्रशिक्षित डाक्टरों भी मिलीभगत रहती है। काली कमाई के चक्कर में सभी मौन रहते हैं। इसका खामियाजा अक्सर मरीजों और उनके घर वालों को भुगतना पड़ता है।

Edited By: Brijesh Srivastava

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