प्रयागराज, जेएनएन। घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं से पीडि़त महिलाओं की झोली खुशियों से भरने वाली महिला का नाम है पंकज सिंह। पति-पत्नी का झगड़ा हो या सास-बहू का झगड़ा, इन सबका समाधान ये आपसी सुलह समझौते के जरिए करती हैं। यह पिछले तीन साल से महिला समाख्या में जिला कार्यक्रम समन्वयक पद पर तैनात हैं। इनकी अगुवाई में जनपद के छह ब्लाकों में नारी अदालत का भी संचालन किया जा रहा हैं। इसमें पीडि़त महिलाओं को न्याय भी मिल रहा है।

पति से होता था विवाद अब हंस-खुशी साथ रह रहे दंपती

कोरांव की मीना (परिवर्तित नाम) के दो बच्चे हैं। पति से आए दिन विवाद होता था। अंत में पति ने मीना को घर से निकाल दिया। महिला समाख्या की सदस्यों ने इसकी जानकारी पंकज सिंह को दी। उन्होंने मीना और उसके पति से मुलाकात कर काउंसिलिंग की। करीब एक माह के अंदर दोनों के बीच समझौता कराया और अब दोनों साथ रह रहे हैं।

परिवार वालों की भी काउंसिलिंग कर रही हैं

करछना की सावित्री (परिवर्तित नाम) को ससुराल पक्ष के लोगों ने घर से निकाल दिया। कोई विकल्प नहीं मिला तो वह गांव के ही पंचायत भवन में रहने लगीं। लोगों के जरिए इसकी जानकारी पंकज सिंह को मिली तो वह टीम के साथ सावित्री के पास पहुंच गई। सावित्री बहुत भयभीत थी। वह सावित्री को पंचायत भवन से निकालीं और उसे अपने साथ रखीं। परिवार वालों की भी काउंसिलिंग कर रही हैं।

क्या कहती हैं पंकज सिंह

पंकज सिंह ने बताया कि ऐसी महिलाएं जो घर या समाज द्वारा प्रताडि़त की जा रही हैं उनके लिए हम सब हमेशा तैयार हैं। जनपद के छह विकासखंड कोरांव, सोरांव, जसरा, शंकरगढ़, कौंधियारा व करछना में नारी अदालत का संचालन किया जा रहा है। प्रयास यही होता है कि महिलाओं को न्याय मिले।

 

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Posted By: Brijesh Srivastava

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