प्रयागराज, जेएनएन। प्रख्यात कथक नृत्यांगना पद्मश्री शोभना नारायण ने कहा है कि पारंपरिक लोक कलाएं, लोक नृत्य, लोकगीत और शास्त्रीय नृत्य अपने देश की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत है। हमें अवसर मिला है कि 'सह नाववतु सह नौ भुनक्तु ' यानी हम साथ-साथ चलें, साथ-साथ खाएं और साथ मिलकर अपनी कलाओं के माध्यम से महामारी को पराजित करें। यह बातें उन्होंने एनसीजेडसीसी (उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र) की ओर से आयोजित वेबिनार में कई राज्यों के कलाकारों और लोकविदों से ऑनलाइन जुड़कर कहीं। कहा कि कलाकार देश का गौरव और सांस्कृतिक विरासत का प्रहरी है।

वेबिनार से जुडे कई राज्‍यों के कलाकार

पद्मश्री शोभना नारायण से दिन में 11 बजे एनसीजेडसीसी के फेसबुक पेज पर उप्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और बिहार के लोग वेबिनार में जुड़़े। कोविड-19 पर कहा कि जैसे पौराणिक युग असुरों को मानव ने पराजित किया था वैसे ही देश की मानव शक्ति अपनी आत्मशक्ति से इसे हराएगी। उन्होंने कलाकारों से अपनी जीवंत कलाओं के माध्यम से इस महामारी को भगाने में योगदान देने की अपील की। 

ग्रामीण कलाकार हमारी धरोहर ही नहीं गौरव भी हैं

प्रसिद्ध लोकविद एवं लोक नाट्य विशेषज्ञ अतुल यदुवंशी ने कहा कि लोक कलाकारों ने लोक संस्कृति के माध्यम से अपना विशिष्ट योगदान दिया है। वेबिनार की शुरुआत में एनसीजेडसीसी के निदेशक इन्द्रजीत ग्रोवर ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रधानमंत्री के 'जान भी जहान ' मुहिम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण कलाकार हमारी धरोहर ही नहीं गौरव भी हैं। बताया कि संस्कृति मंत्रालय की 40 यूनिट, कला, कलाकार और लोक संस्कृति के विकास का प्रयास कर रही है।

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