प्रयागराज, जागरण संवाददाता। जाति के आधार पर बने संगठन देश और समाज का विकास नहीं कर सकते। यह विघटन पैदा करते हैं। चुनाव आते ही इस तरह के संगठन किसी न किसी राजनीतिक दल के एजेंडे पर सक्रिय हो जाते हैं। समाज को गुमराह करने वाले ऐसे समूहों से सचेत रहना होगा। यह विचार भाजपा की राष्ट्रीय परिषद सदस्य रमाशंकर शुक्ल ने जन संवाद के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम सब को देशहित में एकजुट होना पड़ेगा। जाति-वर्ग पर आधारित राजनीति लोकतंत्र को कलंकित करती है। इससे सामाजिक समरसता संक्रमित होती है। देखा जाए तो इस तरह की राजनीति ने आज समूचे समाज को गिरफ्त में ले रखा है।

जातीय एजेंडा के आधार पर हो रहा मेधा से भेदभाव

भाजपा नेता रमाशंकर शुक्ल ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जातीय एजेंडा के आधार पर मेधा के साथ भेदभाव किया जा रहा है। इससे देश का विकास बाधित होगा। प्रतिभाशाली लोगों को चाहे वह आविष्कार के क्षेत्र से जुड़े हों या फिर शासक, प्रशासक, डाक्टर, अभियांत्रिकी से। सभी को स्वतंत्र रूप से समान अवसर मिलना चाहिए। मेधा के साथ भेदभाव कर उसे कुंठित न किया जाए। मेधा ईश्वर प्रदत्त है। इसका लाभ स्वतंत्र रूप से पूरी दुनिया को मिलना चाहिए। इस दिशा में देश के मुखिया को प्रभावी कार्ययोजना बनानी चाहिए।

मुफ्त खाता समाज को अंधकार की ओर धकेला जा रहा

राष्ट्रीय परिषद सदस्य रमाशंकर शुक्ल ने कहा कि आर्थिक विषमता का मुख्य कारण भेदभाव है। एक तरफ करदाता वर्ग देश के विकास में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है। दूसरी तरफ मुफ्त खाता समाज लाचार और इसका आदी हो रहा है। इसकी वजह राजनीतिक दलों की वोट बैंक की राजनीति है। देखा जाए तो मुफ्ता खाता समाज को अंधकार की ओर धकेला जा रहा है। देश के मुखिया को चाहिए कि बिना भेदभाव के योजनाएं प्रस्तुत हों। सब को भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा, सुरक्षा जैसी चीजें अनिवार्य रूप से मिलें। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि आर्थिक विषमता और जातीय राजनीति के बढ़ते चलन, मेधा के साथ हो रहे भेदभाव पर न्यायालय को अपनी चुप्पी तोडऩी चाहिए।

Edited By: Ankur Tripathi