प्रयागराज, जेएनएन। पुलिस विभाग में मनमाने तरीके से सिपाहियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेशों को प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात कांस्टेबिलों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करके चुनौती दी है। कहा गया है कि सेवानिवृत्ति के आदेश कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना और सोच-विचार किए बगैर मनमाने तरीके से पारित किए जा रहे हैं। न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने ऐसी कई याचिकाओं पर सुनवाई के बाद पुलिस विभाग व सरकार से 30 जुलाई तक जवाब मांगा है।

वाराणसी में तैनात रहे महेंद्र कुमार पांडेय व कई अन्य सिपाहियों की याचिका पर आदेश पारित कर हाई कोर्ट ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करने के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की है। ये याचिकाएं वाराणसी के अलावा गोरखपुर, आगरा, गाजियाबाद, कानपुर में तैनात कांस्टेबिलों ने दायर की हैं। सिपाहियों की तरफ से बहस कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश व्यक्तिगत नाराजगी के आधार पर मनमाने ढंग से जिलों के पुलिस अधीक्षकों की ओर से पारित किए जा रहे हैं।

कोर्ट में कहा गया कि ऐसे आदेश पारित करने से पूर्व इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की ओर से पारित निर्णयों को दरकिनार कर दिया गया है। यहां तक कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय की गई गाइड लाइन का भी पालन नहीं किया गया है। इसके तहत एक स्क्रीनिंग कमेटी होगी, जो सेवानिवृत्ति किए जाने वाले कर्मचारी का और उसकी सेवा से संबंधित ब्योरा जुटाएगी। उसकी प्रतिकूल प्रविष्टि आदि पर ध्यान दिया जाएगा तथा कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा, लेकिन इसके विपरीत पुलिस विभाग में बिना किसी जांच के मनमाने तरीके से सिपाहियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश दिया जा रहा है, जो गलत होने के साथ ही गैरकानूनी भी है।

अधिवक्ता विजय गौतम ने ऐसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेशों को रद करने की हाई कोर्ट से मांग की है। यह भी कहा कि सिपाहियों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने दिया जाए। याचिका के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट की ओर से पारित निर्णयों को आधार बनाया गया है, कहा गया कि सारी कार्रवाई पुलिस विभाग एकतरफा कर रहा है।

 

Posted By: Umesh Tiwari

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