प्रयागराज : इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रावासों की नर्सरी में अपराध के बीज नहीं पड़ेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसका खाका तैयार कर लिया है। तीन दिसंबर को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही जिन कमरों में अवैध कब्जे हैं उन्हें खाली कराए जाने, नए छात्रों को आवंटित करने व रेड डालने पर चर्चा होगी।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के साथ ही साथ यहां के छात्रावासों का भी गौरवशाली इतिहास रहा है। कभी यहां सीनियर छात्र व शिक्षक अध्यापन कार्य किया करते थे। चंद्रशेखर, जनेश्वर मिश्र, शंकर दयाल शर्मा, सुभाष कश्यप, हामिद अंसारी, मदन लाल खुराना, सैकड़ों आइपीएस व आइएएस अधिकारी इन्हीं छात्रावासों में रहकर पढ़े और अपने अपने क्षेत्र की ऊंचाइयों को छुआ।

ये छात्रावास स्वतंत्रता आंदोलन के केंद्र रहे। यहीं से अंग्रेजों के खिलाफ बड़ी बड़ी लड़ाइयां लड़ी गई। विडंबना यह है कि आज इन्हीं छात्रावासों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग रह रहे हैं। अपराधियों में कुछ विश्वविद्यालय के छात्र हैं तो ज्यादातर नहीं हैं।

शहर में होने वाली हत्या, लूट की घटनाओं में कई बार छात्रावासों का नाम सामने आता है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन की भी किरकिरी होती है। पिछले दिनों पीसीबी छात्रावास में अच्युतानंद की हत्या होने से सारी व्यवस्था की पोल खुल गई। साबित हो गया कि किस तरह से खुलेआम छात्रावासों में देर रात शराब पार्टी चलती है।

इन सबसे चिंतित विश्वविद्यालय ने छात्रावासों से अपराधियों को हटाने की रणनीति बनाई है। विश्वविद्यालय प्रशासन, स्थानीय व पुलिस प्रशासन के बीच इस संबंध में तीन दिसंबर को बैठक होनी है। बैठक में रेड की रणनीति तय होगी। उधर, पुलिस को इविवि प्रशासन ने छात्रावासों में घुसकर रेड डालने की खुली छूट दे दी है। इसके तहत पहली कार्रवाई ¨हदू छात्रावास में शनिवार रात को हुई। पुलिस ने देर रात रेड डालकर अपराधियों को पकड़ा है। पुलिस को पहली बार मिली छात्रावास में सीधे घुसने की छूट :

इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रावासों में घुसकर अपराधियों को दबोचने की पुलिस को पहली बार खुली छूट दे दी है। इसके अलावा हर छात्र से कक्ष आवंटन से पहले हलफनामा लेने का निर्णय किया है। इस हलफनामें में छात्रों को यह लिखकर देना होगा कि मेरे ऊपर कोई भी आपराधिक मुकदमा नहीं दर्ज है। अभी तक पुलिस को विश्वविद्यालय परिसर व छात्रावासों में घुसने से पहले इविवि प्रशासन से अनुमति लेनी होती थी। इसी का फायदा उठाकर छात्रावासों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग शरण लिए रहते थे। बढ़ेंगी छात्रावासों में सांस्कृतिक गतिविधियां :

छात्रावासों में छात्रों को सकारात्मक गतिविधियों में सक्रिय करने के लिए सांस्कृतिक व साहित्यक गतिविधियों को बढ़ाने की योजना है। चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे ने बताया कि हर छात्रावासों में सांस्कृतिक इकाइयां हैं। उन्हें सक्रिय किया जाएगा। छात्रों को ऊर्जा को सकारात्मक गतिविधियों में लगाने का प्रयास किया जाएगा।

Posted By: Jagran

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