प्रयागराज, जागरण संवाददाता। गंगा, यमुना और अदृश्‍य सरस्‍वती के पावन संगम में प्रत्‍येक वर्ष प्रयागराज में माघ मेला लगता है। इस बार माघ मेला क्षेत्र से स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री और पार्सल भेजने की सुविधा नहीं मिल पाएगी। इस सुविधा के लिए लोगों को मेला क्षेत्र के बाहर दारागंज पोस्ट आफिस जाना होगा। इससे माघ मेला में आने वाले श्रद्धालुओं और कल्‍पवासियों को असुविधा हो सकती है।

डाक विभाग की ओर से मिलती रही है सुविधा

डाक विभाग की ओर से पूर्व में माघ मेला में साधु-संतों व कल्पवासियों की सहूलियत के लिए मेला प्रशासन कार्यालय के पास में पोस्ट आफिस खोला जाता था। इससे विभाग को एक माल में दस लाख रुपये से अधिक की आय होती थी। हालांकि इस बार यहां पर पोस्ट आफिस नहीं खोला जाएगा।

सीनियर पोस्‍ट मास्‍टर ने यह कहा

डाक विभाग के सीनियर पोस्ट मास्टर ने बताया कि माघ मेला क्षेत्र पोस्ट आफिस न खोलने का निर्णय अधिकारियों को है। किस कारण से डाकघर नहीं खोला जा रहा है, इसकी विशेष जानकारी नहीं है। शायद कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण इस बार डाकघर नहीं खोलने का निर्णय लिया गया है।

साधु-संतों के लिए माघ मेला के स्टोर रूम में आया सामान

माघ मेला में लाखों रुपये का बजट साधु-संतों और संस्थाओं को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शासन की ओर से आवंटित किया जाता है। इस बार माघ मेला शुरू होने के पहले ही मेला प्रशासन का स्टोर रूम खाली हो गया था। सुविधा पर्ची लेकर पिछले दस दिनों से संत-महात्मा स्टोर रूम और मेलाधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे थे। सामान की आपूर्ति के लिए इस बार छह वेंडर लगाया गया है। दैनिक जागरण की ओर से पिछले दिनों माघ मेला प्रशासन की ओर से खोले गए दोनों स्टोर रूम में सामान की उपलब्धता की पड़ताल की गई। पड़ताल के दौरान दोनों स्टोर रूम में तख्‍त, तकिया, मेज, कुर्सी आदि उपलब्ध नहीं थे।

मुख्‍य स्‍टोर इंचार्ज बोले

सुविधाओं के लिए भटक रहे संत और पुजारी शीर्षक से रविवार के अंक में खबर प्रकाशित की गई। खबर को संज्ञान में लेते हुए मेला प्रशासन की ओर से दोनों स्टोर रूम में पर्याप्त मात्रा में रजाई, गद्दा, तकिया, कुर्सी, मेज, बेड, तखत, आलमारी आदि मंगा ली गई। संस्थाओं को सामान भेजा भी जाने लगा। मुख्य स्टोर के इंचार्ज देवराज मिश्रा ने बताया कि कुछ सामान समाप्त हुआ था, जिसे समय रहते मंगा लिया गया है। दोनों स्टोर रूम में पर्याप्त सामान उपलब्ध है।

Edited By: Brijesh Srivastava