प्रयागराज : इन दिनों रमजान का पावन महीना चल रहा है। हर ओर अकीदत का माहौल है। मुस्लिम बाहुल्‍य इलाकों में चहल-पहल है। रात से लेकर सहरी तक यह मुहल्‍ले रोशन रहते हैं। कई इलाकों में पूरी रात दुकानें खुल रही हैं। सहरी के बाद बंद फिर शाम को खुलती हैं। पुराने शहर के कई इलाकों में रमजान की रौनक लाउडस्पीकरों पर भी गूंज रही है। रमजान से जुड़ी कव्वाली और तकरीरें माहौल को इबादत भरा बना रही हैं। 
 
बढ़ने लगी है रमजान की रौनक 
माहे रमजान में शहर के मुस्लिम बाहुल्य इलाके पूरी रात रौशन हो रहे हैं। तरावीह के बाद से अलसुबह सहरी तक चहल-पहल देखते ही बन रही है। जगह-जगह नमाजियों का मजमा इबादत और तिलावत में घुला नजर आ रहा है। शहर की तमाम मस्जिदों में पांच दिनी तरावीह मुकम्मल हो गई। पांच रोजा पूरा हो गया, ऐसे में रमजान की रौनक बढ़ने लगी है।

इफ्तार में सजी हैं खान-पान वाली सामग्री की दर्जनों दुकानें 
चौक सब्जीमंडी में तो इफ्तार में खान-पान वाली सामग्री की दर्जनों दुकानें सज रही हैं। यहां तरावीह के बाद सहरी के लिए सामान खरीदने को भीड़ जुटती है। इसी प्रकार नूरुल्लाह रोड, अटाला चौराहा, अकबरपुर आदि में देर रात तक नमाजियों का मजमा लग रहा है। तरावीह पढ़ने के बाद नमाजी, सहरी के वक्त तक जमघट लगाए रहते हैं। निहालपुर, रसूलपुर, करेली, बख्शी बाजार, चकिया, मिन्हाजपुर, बहादुरगंज, शाहगंज, पत्थरगली, नखासकोहना, रोशनबाग आदि में खाने-पीने की दुकाने रंगत बिखेर रही हैं। इमरती, हलवा, जलेबी, शीरमाल, सूतफेनी, लस्सी, खजूर आदि की दुकानों पर इफ्तार से लेकर सहरी तक भीड़ जुट रही है।

खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने की प्रेरणा देता है : मौलाना नादिर
मौलाना नादिर हुसैन बताते हैं कि रोजा दौड़-भाग और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झाकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने की प्रेरणा देता है। रमजान माह भूख-प्यास समेत तमाम शारीरिक इच्छाओं तथा झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी, बुरी नजर डालने जैसी बुराइयों से दूर रखने का जरिया है।

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