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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Muharram 2022: प्रयागराज का एक ऐसा इलाका... जहां हिंदू परिवार बनाता है मुहर्रम का ताजिया

By Brijesh SrivastavaEdited By:
Published: Mon, 08 Aug 2022 04:44 PM (IST)

Muharram 2022 प्रयागराज-प्रतापगढ़ सीमा पर मऊआइमा में कल्याणपुर तिराहे क्षेत्र के समीप स्थित थम्मन का पुरवा गांव के लगभग 10-15 ...और पढ़ें

Muharram 2022: प्रयागराज-प्रतापगढ़ सीमा पर स्थित गांव में हिंदू परिवार मुहर्रम का ताजिया बनाता है।
Muharram 2022: प्रयागराज-प्रतापगढ़ सीमा पर स्थित गांव में हिंदू परिवार मुहर्रम का ताजिया बनाता है।

प्रयागराज, जेएनएन। मुहर्रम का महीना इस्लामी साल का पहला महीना होता है। मुस्लिम समुदायों में इस दिन का खास महत्व होता है। इस्लाम के चार पवित्र महीनों में मुहर्रम के महीने को भी शामिल किया जाता है। अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद ने इस मास को अल्लाह का महीना कहा है। हजरत अली के समर्थक बड़े ही धूमधाम से ताजिया रखकर इबादत करके इस पर्व को मनाते हैं।

मऊआइमा में ताजिया के कलाकार : प्रयागराज-प्रतापगढ़ सीमा पर मऊआइमा में कल्याणपुर तिराहे क्षेत्र के समीप स्थित थम्मन का पुरवा गांव के लगभग 10-15 हिंदू परिवार ताजिया बनाने का पुस्तैनी कारोंबार करते हैं। व्यवसाय व खेती बाडी व अन्य व्यवसाय न होने के कारण पूरा परिवार पुरे साल ताजिया बनाने में जुटा रहता है। इसी व्यवसाय के अपना व अपने परिवार के लोगों का पालन पोषण करता है।

अन्‍य जनपदों में भी यहां के ताजिया की मांग : कारीगर संगम लाल प्रजापति, सुरेश कुमार प्रजापति, बैरागी, हरिलाल, मदन लाल, नन्हे लाल, रमेश कुमार, राजेंद्र, महेंद्र, राजकुमार, लालता व भोगल प्रजापति के साथ मुस्लिम समाज के मो रहीश व मो. मुस्तकीम के मुताबिक हर परिवार के लोग साल भर में एक से दो दर्जन ताजिया बना लेते हैं। एक ताजिया बनाने में लगभग पांच से सात हजार का खर्च आता है। मुहर्रम से एक माह पहले लोग आकर ताजिया को ले जाने को एडवांस रुपये जमा कर बुक कर देते हैं। प्रयागराज ही नहीं कई अन्य जनपदों में भी यहां के ताजिया सप्‍लाई किए जाते हैं।

क्‍या कहते हैं ताजिया बनाने के हुनरमंद : थम्‍मन का पूरा गांव के संगम लाल प्रजापति कहते हैं कि ताजिया पिछले वर्ष बनाकर तैयार की थी लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते काफी नुकसान हुआ था। सुरेश प्रजापति बोले कि अपने पूर्वजों के ताजिया बनाने की कला को सीखा है। इसी से जीवन यापन कर रहे हैं। नन्‍हेंलाल प्रजापति ने कहा कि ताजिया को बनाने के बाद पाक साफ तरीके से रख कर हिफाजत करते हैं। हरि लाल प्रजापति बोले कि  खेती न होने के चलते ताजिया बनाने की कला सीखी।