प्रयागराज, जेएनएन। प्रख्यात वैज्ञानिक मिसाइल मैन व देश के 11 वें राष्ट्रपति भारत रत्न डा. एपीजे अब्दुल कलाम के सपने को प्रतापगढ़ के रानीगंज में पंख नहीं लग सके। शायद इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अमृत फल आंवला की खेती करने वाले किसान मोइनुद्दीन के घर आंवले की गुणवत्ता व शोहरत ने डा. एपीजे अब्दुल कलाम को प्रतापगढ़ के रानीगंज तहसील क्षेत्र के भूसलपुर गांव आने को मजबूर कर दिया था। इसके बावजूद हालात नहीं बदल सके। लोग सरकार से पहल करने की मांग कर रहे हैं।

रानीगंज क्षेत्र के शहीद स्थल कहला की धरती, जहां के लोगों ने देश को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। वहीं देश के तत्कालीन राष्ट्रपति रहे वैज्ञानिक डा. अब्दुल कलाम रानीगंज भूसलपुर गांव में आंवला किसान मोइनुद्दीन खान के आंवले की बाग में आंवला फल देखने दो मई 2007 को बाएफ द्वारा आमंत्रण पत्र पर आए थे। वह आंवले का फल देखकर खुश थे। किसान मोइनुद्दीन की पीठ थपथपा कर आंवला उत्पादन बढऩे को कहा था। किसान मोइनुद्दीन के परिवार से राष्ट्रपति मिले थे।

हालांकि राष्ट्रपति के यहां आने के 14 साल बीतने के बावजूद भी प्रतापगढ़ जिले में आंवला उत्पादन व किसानों की समस्याओं को दूर करने को लेकर सरकार द्वारा कुछ ऐसा नहीं किया गया है, जिससे कि प्रतापगढ़ जिले की खास पहचान आंवला के क्षेत्र में बन सके। रानीगंज में भी कुछ ऐसा नहीं हो सका, जहां पर राष्ट्रपति के सपनों को साकार करने के लिए कुछ किया गया हो। सरकारें आती और जाती रही। कार्य भी अलग-अलग क्षेत्रों में होते रहे हां कुछ नहीं हुआ तो वह है मिसाइल मैन के सपनों का पूरा करने का कार्य, जिससे कि वह प्रतापगढ़ धरती पर आकर एक किसान के कार्यक्रम में वादा करके गए थे।

डा. कलाम ने यहां पर प्रदर्शनी देखी थी, जिसे देखकर वह बेहद प्रसन्न हुए थे। बच्चों को आटोग्राफ दिए थे। किसान मोइनुद्दीन के घर तक सड़क भी नहीं बन सकी है। मोइनुद्दीन का कहना है कि डॉ. कलाम का कुछ भी वादा सरकारों ने नहीं पूरा किया। 15 अक्टूबर को देश के 11 वें राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्मदिन है, ऐसे जब से वह रानीगंज आए हैं तब से उनका जन्मदिन आने पर हर साल लोगों को याद आते हैं।

Edited By: Brijesh Srivastava