प्रयागराज, जागरण संवाददाता। जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में करीब 15 फीसद तक वृद्धि होने से मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। इससे सांस, दिल (हृदय), शुगर के मरीजों का इलाज महंगा हो गया है। एंटीबायोटिक दवाओं पर भी महंगाई की मार पड़ी है। कोरोना महामारी के बाद दवाओं के रेट में आए उछाल से मरीजों का हाल बेहाल है।

कच्चे माल का दाम आसमान पर

पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार वृद्धि होने से कच्चे माल के दाम आसमान छूने लगे हैं। इसका असर दवाओं के मूल्यों पर भी पड़ा है। कंपनियों द्वारा दवाओं के दाम बढ़ा देने से हृदय, सांस, गर्भावस्था संबंधी बीमारियों के अलावा एंटीबायोटिक दवाओं की कीमतों में काफी उछाल आया है। कई जीवनरक्षक दवाएं ऐसी है, जिन्हें मरीजों को लंबे समय तक खाना पड़ता है, उनके भी दाम बढ़े हैं। दवाओं के रेट बढऩे से मरीजों के साथ दवा विक्रेता भी परेशान हैं।

इस तरह बढ़े दाम (रुपये में)

-कैंडीफोर्स-200 सात कैप्सूल 144 से बढ़कर 153

-हृदय रोग की दवा रोजावेल-20 के 10 टेबलेट का पत्ता 303 से बढ़कर 330

-खांसी की दवा सिनारिस्ट सिरप के रेट 99 से बढ़कर 110

-सांस की दवा एबीफाईलीन-100 के 10 कैप्सूल का पत्ता 123 से बढ़कर 135

-यूरिक एसिड की दवा फेबुस्टेट-40 के 15 टेबलेट का पत्ता 178.50 से बढ़कर 198

-सेरोफलो रोटाकेप्स 30 कैप्सूल का पत्ता 188 से बढ़कर 206

-डियोलीन फोर्ट इनहेलर 324 से बढ़कर 356

-फारमोनाइड फोर्टरोटाककेप्स 30 कैप्सूल का पत्ता 300 से बढ़कर 330

-एलर्जी की दवा कैंडीफोर्स-100 का सात कैप्सूल 70 से बढ़कर 80

-भाप की दवा कारवेल प्लस का 10 कैप्सूल 69 से बढ़कर 76

-दर्द की दवा डोलोनेक्स डीटी 15 टेबलेट का पत्ता 179 से बढ़कर 196

पेट्रोल-डीजल के दाम बढऩे से कच्चे माल का दाम काफी बढ़ गया है। इसकी वजह से कंपनियों ने कई दवाओं के दाम बढ़ा दिए हैं। कीमतों में करीब 15 फीसद तक वृद्धि हुई है।

-अनिल दुबे, अध्यक्ष, इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन

Edited By: Ankur Tripathi