प्रयागराज, जेएनएन। शंकर-पार्वती की आराधना कर पति की लंबी उम्र मांगने के पर्व हरतालिका तीज को लेकर सुहागिन महिलाओं में उत्साह नजर आ रहा है। पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में चहल-पहल है। शंकर-पार्वती, सुहाग की पिटारी, खीरा, रबड़ी, सूतफेनी व लाल कपड़े समेत सोलह श्रृंगार के सामान की जमकर खरीदारी हो रही है।

बाजारों में भीड़, पूजन सामग्री की दुकान सजी

हरतालिका तीज का पर्व सोमवार को मनाया जा रहा है। बाजार के लिए छोटे, मध्यम और बड़े स्तर पर व्यापार करने वाले लोगों ने तैयारी कुछ दिन पहले ही कर ली है। अधिकांश सामग्री स्थानीय स्तर पर ही बनती और मिल जाती है। मिट्टी से बने शंकर-पार्वती की मूर्ति की बिक्री खूब हो रही है। इनके भाव को लेकर मोलभाव भी की जा रही है। कुछ जगहों पर तो 150 रुपये तक मूर्तियां बेची जा रही है। आमतौर पर इनके दाम 70-80 रुपये तक ही रहता है। सुहाग के सामान फुटकर में भी बिके और इसकी पिटारी खरीदने में भी महिलाओं ने दिलचस्पी ले रही हैं। चौक बाजार की फलमंडी में बिंदी, नेलपेंट, मेंहदी की कोन, आर्टीफीशियल मंगलसूत्र, सजने संवरने के अन्य सामान की खरीद के लिए दुकानों पर महिलाओं की भीड़ है। बिछिया खरीदने के लिए महिलाओं की भीड़ सराफा बाजार में भी खूब रही। पर्व की वजह से आज भी कई सराफा की दुकानें खुली हैं। सादी बिछिया के साथ नग वाली और रंगीन बिछिया की डिमांड है।

खीरा बन गया 'हीरा'

सब्जी की दुकानों व अन्य ठेलों पर खीरा आमतौर पर 20 या 30 रुपये किलो तक बिकता है। पर्व के मद्देनजर ठेलों पर जैसे खीरे की लूट मची हो। मानो खीरा न होकर वह हीरा हो गया है। एक खीरा 30 रुपये में बिक रहा है। शनिवार के मुकाबले रविवार को खीरा और महंगा हो गया है।

सूतफेनी और रबड़ी की जमकर बिक्री

हलवाइयों की दुकानों पर सूतफेनी और रबड़ी खरीदने के लिए लोगों में होड़ मची है। देसी घी की सूतफेनी के दाम तो कहीं-कहीं 600 रुपये किलो तक रहे।  लोग अपनी हैसियत के अनुसार खरीदते रहे। तीज व्रत रखने से पहले इसे खाने की मान्यता है। 

 

मेंहदी लगवाने की मची होड़

सिविल लाइंस का सुभाष चौराहा, शॉपिंग मॉल, चौक, कटरा और सुलेम सरांय की बाजार में भी कोन मेहंदी लगाने वाले कलाकारों की चांदी है। मेहंदी लगवाने के लिए महिलाएं और युवतियों को अपनी बारी के इंतजार में एक-एक घंटे बैठना पड़ रहा है। मेहंदी लगाने के लिए कलाकार 300 से 500 रुपये तक ले रहे हैं। सिविल लाइंस में कुछ जगहों पर टोकन भी दिए जा रहे हैं।

हरतालिका तीज का व्रत दो सितंबर को : पंडित गिरजा शंकर शास्त्री

काशी ङ्क्षहदू विश्वविद्यालय वाराणसी के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर पं. गिरिजा शंकर शास्त्री कहते हैं कि जब तक चतुर्थी से तृतीया का मेल नहीं होता तब तक उस पूजन को भगवान शिव, पार्वती के साथ ग्रहण नहीं करते। धर्मशास्त्र और ज्योतिष शास्त्र के आचार्यों के मत को देखते हुए चतुर्थी और तृतीया एक ही दिन दो सितंबर का पड़ रही है। ऐसे में तीज का व्रत दो सितंबर को ही रखना उचित है।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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