जागरण संवाददाता, प्रयागराज : देश के प्रतिष्ठित व्यवसायी महाशय धर्मपाल गुलाटी का जीवन हर किसी को प्रेरणा देता है। उन्होंने मसाले के व्यवसाय को ऊंचाइयों पर ले जाने के अलावा भी अन्य कई बड़े काम किए। लेकिन, प्रयागराज में पांच सौ बच्चियों का वैदिक कन्या गुरुकुल विद्यालय खोलने का उनका सपना अधूरा रह गया। उत्तर प्रदेश की आर्य प्रतिनिधि सभा के उपमंत्री पंकज जायसवाल बताते हैं कि वैदिक विद्यालय के लिए अरैल में आठ बिस्वा जमीन देखकर उसकी सूचना महाशय को दे दी गई थी। वे कोई निर्णय लेते उसके पहले दुनिया से चले गए। महाशय धर्मपाल के निधन की खबर पाते ही लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।

पंकज बताते हैं कि महाशय धर्मपाल 2016 के माघ मेला व 2019 के कुंभ में आर्य समाज के सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रयागराज आए थे। कुंभ में ही उन्होंने प्रयागराज में वैदिक विद्यालय खोलने की इच्छा जताई थी। आर्य समाजी संजय सिंह बताते हैं कि कुंभ में महाशय ने 'सत्यार्थ प्रकाश' की एक लाख पुस्तक का वितरण कराया था। उन्होने नागवासुकि मंदिर का दर्शन किया था। धर्माचार्य आचार्य शांतनु जी कहते हैं दिल्ली व राजस्थान में होने वाले मेरे प्रवचन में महाशय धर्मपाल श्रद्धाभाव से आते थे।

---- आर्य समाज के लोगों ने जताया शोक

प्रयागराज : जिला आर्य प्रतिनिधि सभा प्रयागराज की बैठक गुरुवार को हुई। इसमें महाशय धर्मपाल गुलाटी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। शोकसभा में विजयानंद सिन्हा (प्रशासक), पंकज जायसवाल, संजय सिंह, अरुणेश जायसवाल, प्रेम प्रकाश कुलश्रेष्ठ, अभिषेक यादव, अजय मेहरोत्रा, सुरेंद्र धवन, रवि पांडेय, शिव प्रसाद सिंह, पीएन मिश्र, हीरालाल आर्य आर्यजन उपस्थित रहे।

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