जागरण संवाददाता, प्रयागराज : अल्लापुर स्थित श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी से सीसीटीवी फुटेज महंत नरेंद्र गिरि ने हटवाए थे। इसके लिए उन्होंने सीसीटीवी लगाने वाले हासिम अली को मठ बुलवाया था। हालांकि तकनीकी समस्या के कारण एक डिजिटल वीडियो रिकार्डर (डीवीआर) से फुटेज को नहीं हटाया जा सका। इसी फुटेज से पता चला है कि महंत अपने सेवादार सर्वेश से नायलान की रस्सी लेकर प्रतीक्षा कक्ष में गए थे। इसके बाद उनकी संदिग्ध दशा में शव मिला था। सीबीआइ की जांच में यह तो पता चल गया कि महंत ने फुटेज हटवाए थे, लेकिन इसके पीछे वजह क्या थी। यह साफ नहीं हो सका है।

छानबीन के दौरान यह बात भी सामने आई है कि घटना से आठ दिन पहले यानी 12 सितंबर को महंत ने हरिद्वार जाने की योजना बनाई थी, मगर खराब मौसम के कारण वह नहीं जा पाए थे। फिर मठ में ही उनसे बिल्डर शैलेंद्र सिंह, एस शैलेष मोदी सहित कुछ अन्य लोग मिलने आए थे। संपत्ति डीलरों से मुलाकात के बाद ही महंत ने सीसीटीवी लगाने वाले हासिम अली को बुलवाया था। उसे डीवीआर में रखे फुटेज को हटाने के लिए कहा था।

नहीं जा पाए मुख्यमंत्री से मिलने

15 सितंबर को नरेंद्र गिरि ने लखनऊ में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा था और गोमती नगर स्थित एक होटल में ठहरने की व्यवस्था के लिए उन्होंने शैलेंद्र सिंह से कहा था। मगर महंत वहां भी नहीं जा पाए थे। इसी दौरान हरिद्वार से राकेश गोयल नामक व्यक्ति भी महंत से मिलने आया था। राकेश ने जांच एजेंसी को पूछताछ के दौरान बताया कि हरिद्वार में जमीन खरीदने के सिलसिले में महंत से मिले थे। इसका पर्दाफाश सीबीआइ की ओर से कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में किया गया है।

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25 लाख के लेनदेन का पता नहीं चल सका

महंत के सुसाइड नोट में कुछ प्रापर्टी डीलर से 25 लाख रुपये के लेनदेन का जिक्र था, मगर सीबीआइ के आरोप पत्र में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि महंत को किस शख्स से पैसा लेना था और इसकी वजह क्या रही होगी।

Edited By: Jagran