प्रयागराज, जागरण संवाददाता। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु की जांच कर रही सीबीआइ टीम अब तक एडिशनल एसपी से पूछताछ नहीं कर सकी है। इसको लेकर मठ और मंहत से जुड़े लोग जांच एजेंसी पर सवाल उठाने लगे हैं। उनका तर्क है कि अभियुक्त आनंद गिरि ने कई लोगों नाम बताया है। उसमें एक सपा, भाजपा नेता से पूछताछ की जा चुकी है लेकिन एडिशनल एसपी से सवाल नहीं हुआ। इसकी वजह क्या हो सकती है, इस पर भी कई तरह की चर्चा हो रही है।

इन लोगों ने गुरु-शिष्‍य में करवाया था समझौता

बताया जाता है कि महंत नरेंद्र गिरि और उनके परम शिष्य आनंद गिरि के बीच जब विवाद हुआ था तो कुछ दिनों बाद सपा, भाजपा नेता और एडिशनल एसपी ने उनके बीच समझौता करवाया था। तीनों की मौजूदगी में लखनऊ में गुरु-शिष्य ने अपने विवादों का पटाक्षेप करते हुए एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल किया था। हालांकि महंत की संदिग्ध दशा में मौत के बाद समझौता कराने वालों को भी जांच के दायरे में लाया गया था।

साक्ष्‍य मिलने पर सीबीआइ पूछताछ कर सकती है

सीबीआइ इस मामले में सपा और भाजपा नेता से पूछताछ तो कर चुकी है लेकिन एडिशनल एसपी का अब तक बयान दर्ज नहीं किया गया है। अब इसको लेकर मठ, मंदिर और महंत से जुड़े लोग कयास लगा रहे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यदि एडिशनल एसी के विरुद्ध कोई साक्ष्य मिलता तो पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।

फिर मठ पहुंची टीम, सेवादारों से पूछताछ

सीबीआइ टीम एक बार फिर अल्लापुर स्थित श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी पहुंची। यहां उसने महंत के सेवादारों, शिष्यों से काफी देर तक पूछताछ करती रही। इसके बाद उस अथिति कक्ष में गई, जहां संदिग्ध दशा में नरेंद्र गिरि की मृत्यु हुई थी। मठ से जुड़े लोगों का कहना है कि जांच एजेंसी के अधिकारियों ने कुछ लोगों से मंदिर, मठ और हरिद्वार से जुड़े कई सवाल पूछे। साथ ही आरोपित आनंद गिरि, आद्या प्रसाद व उसके बेटे संदीप के बारे में जानकारी जुटाई।

Edited By: Brijesh Srivastava