प्रयागराज, विधि संवाददाता। मऊ से पूर्व विधायक और माफिया मुख्तार अंसारी जेल में है और उनके वकील दरोगा सिंह भी कार्यवाही की जद में आ गए हैं। न्यायाधीशों के लिए उन्होंने कुछ समय पहले कई लोगों के बीच अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। वीडियो इंटरनेट मीडिया में वायरल होने के बाद उप्र बार काउंसिल ने सख्त कार्यवाही की। दरोगा सिंह का पंजीकरण तो तत्काल प्रभाव से निलंबित कर ही दिया गया है साथ ही जिलाधिकारी मऊ तथा बार एसोसिएशन से भी अधिवक्ता के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए संस्तुति की गई है।

न्यायाधीशों के लिए कहे अपशब्दों का वीडियो हुआ था वायरल

अधिवक्ता दरोगा सिंह जिला न्यायालय मऊ में वकालत करते हैं। वह मुख्तार अंसारी की पैरवी काफी समय से करते आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि कुछ समय पहले उनका ऐसा वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह सारी मर्यादा लांघते हुए जजों के लिए अपशब्द बोलते दिखाई दे रहे हैं। आरोपित अधिवक्ता के खिलाफ मऊ जनपद के विभिन्न थानों में 10 मुकदमे भी दर्ज हैं। शिकायत मिलने पर उप्र बार काउंसिल ने मामले का संज्ञान लिया और 17 मई को आपात बैठक बुलाई। इसमें अधिवक्ता पर कार्रवाई का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।

बार काउंसिल पदाधिकारियों ने कहा वीडियो एवं प्राथमिक सूचना रिपोर्ट के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि दरोगा सिंह ने अधिवक्ता आचरण के विरूद्ध कार्य किया है। न्यायाधीशों के लिए अपशब्दों का प्रयोग शर्मनाक कृत्य है। ऐसे में अधिवक्ता दरोगा सिंह का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है। अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। काउंसिल के निर्णय से संबंधित पत्र सदस्य सचिव अजय कुमार शुक्ल की ओर से सोमवार को जारी किया गया। हालांकि इस पत्र पर 25 जून की तिथि अंकित है। काउंसिल के आदेश पत्र की प्रतिलिपि जिला जज व जिलाधिकारी मऊ के अलावा आवश्यक कार्यवाही के लिए सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन मऊ के अध्यक्ष तथा मंत्री को भी प्रेषित की गई है।

दबंगई के वायरल वीडियो से ही बढ़ी अधिवक्ता दारोगा सिंह की मुश्किलें

मऊ : सदर के पूर्व विधायक व माफिया मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता दारोगा सिंह के दबंगई के वायरल वीडियो से ही उनकी मुश्किलें बढ़ गईं हैं। यही नहीं उनके खिलाफ कई थानों में विभिन्न धाराओं में मुकदमा भी दर्ज है। इसे लेकर पहले से ही यह मामला सुर्खियों में था कि दारोगा सिंह के ऊपर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि एफअाइआर दर्ज किए जाने के बाद पुलिस प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर पाया लेकिन स्थानीय बार के अधिवक्ता भी इस मामले से काफी दुखी थे।

मई माह में कैबिनेट मंत्री व जनपद प्रभारी संजय निषाद दौरे पर आए थे। इस दौरान वह रात्रि प्रवास के दौरान किन्नपूर गांव गए थे। यहां बिजली व बदहाल व्यवस्था को देखकर अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त की थी। समीक्षा बैठक में भी मंत्री ने अधिकारियों से कड़ाई से कहा था कि अगली समीक्षा बैठक से पहले यहां की जितनी समस्याएं हैं, वह पूरी तरह खत्म हो जानी चाहिए। इसके बाद तो अधिकारियों को मानो करंट सा लग गया था। राजस्व विभाग की पूरी टीम के साथ किन्नूपुर गांव की पैमाइश और रास्ते के लिए लगा गई थी। इसके बाद सरकारी जमीनों और रास्तों की चारों तरफ से पैमाइश शुरू हो गई थी। यहां मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता दारोगा सिंह की भी जमीन है। जब राजस्व की टीमें जमीनों को नाप कर अलग करने लगीं, तो यह बात कब्जा जमाए दरोगा सिंह को नागवार गुजरी। उन्होंने सैकड़ों लोगों के बीच में सरकारी राजस्व कर्मियों को धमकाते हुए गाली-गालौज की। यही नहीं उन्होंने जज को अपशब्दों का प्रयोग किया। इसी भीड़ में से किसी गांव वाले ने इसका वीडियो को बनाकर वायरल कर दिया था। इसके बाद इनके खिलाफ कानूनगों ने सरायलखंसी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके अलावा शहर कोतवाली में भी दारोगा सिंह के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर दारोगा सिंह ने कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की नोटिस नहीं दी गई है। एेसे में यूपी बार काउंसिल द्वारा उनका रजिस्ट्रेशन सस्पेंड करना न्यायोचित नहीं है। वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

Edited By: Ankur Tripathi