प्रयागराज : घर-परिवार की जरूरतें पूरी करने में कैलाश नाथ कर्ज के बोझ तले दबता चला गया। एक दिन ऐसा आया कि इस बोझ ने उसकी ¨जदगी की डोर ही काट दी। प्रतापगढ़ के चिलबिला रेलवे स्टेशन पर जनता एक्सप्रेस से कटकर जान देने वाले कैलाश को सूदखोरों की धमकी लील गई। सुजानगंज जौनपुर के 32 साल का कैलाश खाना बनाने का कारीगर था। उसकी शादी हो चुकी थी। दो मासूम बच्चे हैं।

उसने खुदकशी का कारण तो नहीं लिखा था, पर उसके करीबियों को उसकी माली हालत के बारे में पता था। वह दोस्तों को बीच में कभी-कभी कहता था कि सूदखोरों का बहुत दबाव है। लगता है जी नहीं पाऊंगा। इस बीच वह शुक्रवार को जब अपनी बहन के घर प्रतापगढ़ के नगर कोतवाली के महुली आया तो बहुत तनाव में था। उसने अपने जीजा सभासद दीपक के घर खाना भी नहीं खाया। कहा दो घंटे में आता हूं। फिर वह ना आया, उसकी मौत की मनहूस खबर आई।

उसके शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया। शनिवार को प्रयागराज में उसका दाह संस्कर भी हो गया। उसके सभासद जीजा दीपक का कहना है कि कैलाश कर्ज से परेशान था, ऐसा उसके घर से पता चला है। उधर जीआरपी के नवागत इंस्पेक्टर फूल ¨सह का कहना है कि परिजनों ने तहरीर में कोई कारण नहीं लिखा। किसी पर आरोप भी नहीं लगाया, फिर भी छानबीन की जा रही है। मामले की जांच करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, कैलाश की मौत से परिजनों में मातम छाया है। पत्‍‌नी और दो मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।

Posted By: Jagran