प्रयागराज, जागरण संवाददाता। जल ही जीवन है। जीवन के लिए पानी की जरूरत है। लगभग चार दशक पहले तक तालाबों व जलाशयों के पानी से खेती की सिंचाई होती थी। घरों तक में तालाबों से पानी जाता था। साथ ही अन्य जरूरतों को भी लोग तालाब के ही पानी से पूरा करते थे, लेकिन देखरेख के अभाव में तालाबों में अतिक्रमण हो गया। तालाबों की खोदाई व सुंदरीकरण के लिए करोड़ों रुपये खर्च भी हो रहा है। इसके बाद भी सैकड़ों तालाबों पर अवैध कब्जा है। जलशक्ति मंत्रालय की ओर से हाल ही में तालाबों की पांचवी गणना कराई गई है, जिसमें तालाबों व जलाशयों पर भारी पैमाने पर अवैध कब्जा सामने आया है। कौशांबी जिले के 870 तालाबों में अवैध कब्जा है। इसकी वजह से इन तालाब उपयोग में नहीं आ रहे हैं।

शासन के आदेश की जिले में अनदेखी

वर्षा जल संचयन कर भूगर्भ जल स्तर सुधारने के लिए सरकार की तरफ से कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं। कौशांबी जिले में 8872 तालाब हैं। इनमें पहले 2032 तालाबों पर अतिक्रम और अवैध कब्जा था। वर्ष 2017 में चलाए गए अभियान में 1162 तालाबों को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया था। तालाबों की सफाई व सुंदरीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये भी खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी 870 तालाबों पर अवैध कब्जा है। इन तालाबों पर लोग खेती कर रहे हैं या फिर आलीशान भवन बन गए हैं। अधिकांश तालाबों का रकबा छोटा हो गया है। लिखित शिकायत के बाद भी कब्जा धारकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। तालाबों में अवैध कब्जा होने वर्षा जल का संचय नहीं हो पा रहा है। कुछ तालाबों में बस्ती आबाद हो गई है। तो कुछ में भूमाफिया खेती कर रहे हैं। जिन तालाबों पर अवैध तरीके से कब्जा है, उसमें जिला मुख्यालय मंझनपुर, नगर पालिका परिषद भरवारी, नगर पंचायत अजुहा, नगर पंचायत करारी, मंझनपुर तहसील क्षेत्र के ऊनो, कुलौली, सिराथू तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत नारा, चक गांव व चायल आदि गांवों के तालाब प्रमुख हैं। शासन के निर्देश पर दो वर्ष पूर्व तालाबों को कब्जे से मुक्त कराने के लिए तहसील प्रशासन की ओर से अभियान भी चलाया गया था, जो महज खाना पूर्ति बन कर रह गया। अभियान के दौरान जिन तालाबों को कब्जे से कराया गया था। उनमें से अधिकतर तालाबों पर लोगों ने दोबारा कब्जा कर लिया है।

भू माफिया ने बदल दिया नक्शा

नगर पालिका परिषद भरवारी के आर्थिक रूप से समृद्ध लोगों ने तालाबों पर अतिक्रमण कर लिया। इसके बाद आसपास के तमाम अन्य लोग भी तालाबों का नक्शा बदलने में लग गए। अतिक्रमण से कई तालाब तो पूरी तरह से अस्तित्व विहीन हो गए। यहां कुल चार तालाब बचे हैं, जिनका क्षेत्रफल तकरीबन 28 बीघे है। रिहायशी क्षेत्र में होने के कारण इनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। गौरा का धौरहा तालाब 18 बीघे का है। मौजूदा समय में 10 बीघा भी नहीं बचा होगा। नैतारा तालाब वार्ड नंबर 4 गौरा में स्थित है। डेढ़ बीघा का यह तालाब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। वार्ड नंबर 11 में पांच बीघे का तालाब सिमट कर अब ढाई बीघा ही बचा है।

नोटिस तक तक ही रह गई कार्रवाई

जिला मुख्यालय मंझनपुर के नया नगर व हजरतगंज समेत कई तालाबों पर स्थानीय लोगों ने अवैध तरीके से कब्जा कर मकान बना लिया है। शिकायत पर पूर्व जिलाधिकारी लोकेश एम ने तालाबों को खाली कराने के लिए संबंधित व्यक्तियों को पूर्व में नोटिस दी थी। तालाबों में बने मकानों को खाली कराने के लिए निशान भी लगाए गए थे, लेकिन डीएम के तबादले के बाद मामला ठंडे बस्ते में जला गया।

महरोहनी के तालाबों पर आबादी

सिराथू तहसील क्षेत्र के मंगरोहनी के आठ बीघा के तालाब पूरी तरह से बस्ती आबाद हो गई है। इस तालाब में 60 से अधिक लोगों ने मकान बना लिया है, जिसमें 300 से अधिक लोग रहती है। जांच के बाद तहसील प्रशासन ने दो वर्ष पूर्व जिला प्रशासन का रिपोर्ट भेज दिया है कि इस तालाब को खाली कराना संभव नहीं है। यदि तालाब को खाली कराया गया तो सैकड़ों लोग बेघर हो जाएंगे।

डीएम का है यह कहना

जिले के तालाबों पर हुए अवैध कब्जे को हटाने के लिए सभी एसडीएम को निर्देश दिया गया है। शनिवार व रविवार को विशेष अभियान चलाया जाता है। मंझनपुर व मगरोहनी के तालाबों पर किए गए कब्जे की रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी से मांगी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी की जाएगी।

सुजीत कुमार, जिलाधिकारी

Edited By: Ankur Tripathi