जासं, इलाहबाद : पत्थर गिरिजा घर के सामने जीजीआइसी मैदान पर लगे 10वे राष्ट्रीय पुस्तक मेले के दूसरे दिन मंगलवार की सुबह से लेकर देर शाम तक युवाओ की भीड़ उमड़ी। शाम को प्रख्यात कथाकार दूधनाथ सिंह के कृतित्व और व्यक्तित्व पर आयोजित परिचर्चा मे साहित्यकारो ने कहा कि दूधनाथ सिंह अब हमारे बीच नही है, लेकिन वह साहित्य के जरिए हमेशा हमारे साथ रहेगे। परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए डॉ. राम प्यारे राय ने कहा कि उनका और दूधनाथ सिंह का 30 सालो तक संबंध रहा। उन्होने कभी भी यह महसूस नही होने दिया कि वह कितने बड़े साहित्यकार है। वह उन्हे कभी भूल नही पाएंगे। प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि साझा संस्कृति के विध्वंस पर मुखर सैनिक के रूप मे दूधनाथ सिंह एक अकेला नाम है, जो एक पृष्ठ नही, अपितु एक समूचा ग्रंथ है। साहित्यकार यश मालवीय ने कहा कि उन्होने अभिव्यक्ति के चरम पर जाकर लेखन किया। उनके करीबी और अंतिम क्षण मे दूधनाथ सिंह के पास रहे सुधीर सिंह ने कहा कि उनमे हमेशा से छोटे-बड़े के लिए बड़प्पन की भावना रही। कार्यक्रम का संचालन आशिया अल्वी व डॉ. संतोष चतुर्वेदी ने किया। वही दूसरे पक्ष मे काव्यपाठ का आयोजन किया गया। उसमे लखनऊ से आई कवयित्री रूप पांडेय सतरूपा ने अपनी रचनाओ से नारी सशक्तीकरण को प्रस्तुत किया। वही जय कृष्ण तुषार, यश मालवीय, प्रमोद द्विवेदी, वीरेद्र तिवारी ने काव्य पाठ किया। मंच का संचालन कवि और प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्लेष गौतम ने किया। धन्यवाद ज्ञापन आयोजक देवराज अरोडा ने किया। बुधवार को दोपहर रीड पब्लिकेशंस द्वारा सम्मान समारोह और पुस्तको का विमोचन किया जाएगा। ----- नए प्रकाशको के स्टालो पर अधिक भीड़ नॉलेज हब द्वारा लगाए गए 10वे राष्ट्रीय पुस्तक मेले मे नेशनल बुक ट्रस्ट, प्रकाशन संस्थान, सामयिक, योगदा संस्थान द्वारा भी स्टाल लगाया गया है। मेले मे पहली बार डायमंड बुक्स ने स्वयं स्टाल लगाई है। इससे पहले उनके द्वारा स्टाल लगवाई जाती रही है। युवाओ को सबसे ज्यादा नए प्रकाशको की पुस्तकें पसंद आ रही है। साहित्यक पुस्तको मे विदेश साहित्यकारो की पुस्तको का ¨हदी अनुवाद सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है। प्रकाशन संस्थान के स्टाल प्रबंधक मनोज शर्मा ने बताया कि उनके प्रकाशन की विवेकानंद विचार कोश, सत्य के प्रयोग, आंबेडकर समेत अन्य सभी महत्वपूर्ण व्यक्तियो पर प्रकाशित पुस्तकें युवाओ को भा रही है। खोखला पहाड़, लाल पोस्ते के फूल, एक क्लर्क की मौत और भारत के प्रख्यात नास्तिक पुस्तके सबसे ज्यादा बिक रही है। ----