प्रयागराज, जेएनएन। युवाओं को रोजगार देने के लिए गठित उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग भर्तियां से अधिक घोटालों की जांच के कारण चर्चा में है। फिलहाल तो उप्र लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) जांचों के भंवर में फंसा है।

भर्तियों में गड़बड़ी से यूपीपीएससी के खिलाफ सीबीआइ समेत तीन जांचें केंद्र व राज्य सरकार की ओर से और एक अनोखी जांच उन अभ्यर्थियों की ओर से बाहरी तौर पर हो रही है जो यूपीपीएससी की मनमानी का शिकार हुए हैं। वहीं कर्मचारी/अधिकारी संघ न्यायिक जांच की मांग पर अड़ा है।

अखिलेश यादव की सरकार के कार्यकाल में यूपीपीएससी की भर्तियों में घोटाले होने के खूब आरोप लगे। योगी आदित्यनाथ सरकार ने यहां पांच वर्ष (एक अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017) के दौरान हुई सभी भर्तियों की सीबीआइ जांच का एलान किया था। 31 जनवरी 2018 से सीबीआइ जांच शुरू है।

इसी बीच यूपीपीएससी के खिलाफ यूपी एसटीएफ ने भी जांच शुरू कर दी है। मामला एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती 2018 में प्रश्नपत्र लीक होने का है। जिसमें प्रिंटिंग प्रेस संचालक कौशिक कुमार कर व यूपीपीएससी की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार की गिरफ्तारी हो चुकी है। अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की एसटीएफ गोपनीय जांच में जुटी है। प्रकरण को गंभीर मानते हुए प्रदेश सरकार ने एसआइटी से जांच शुरू करा दी है। इसमें यूपीपीएससी में उपजे हालात, कारण और निष्कर्ष निकालने की रिपोर्ट शासन को सौंपी जानी है।

यह अनोखी जांच

अब यूपीपीएससी के उन बदनाम अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ पीसीएस परीक्षा के अभ्यर्थियों की एक समिति पीछे पड़ गई है जिनके माथे पर पूर्व अध्यक्ष डॉ अनिल यादव के करीबी होने का ठप्पा लगा है। अभ्यर्थियों ने ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों की संपत्ति का ब्यौरा इकठ्ठा करना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत अधिकारियों व कर्मचारियों के आलीशान घरों व अन्य बेनामी संपत्तियों से की गई है।

न्यायिक जांच की मांग पर अड़े

यूपीपीएससी कर्मचारी अधिकारी संघ इस मांग पर अड़ा है कि पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच हो। इस संबंध में चेयरमैन प्रो. अनिरुद्ध सिंह यादव को पत्र भी दिया गया है।

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Posted By: Dharmendra Pandey

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