प्रयागराज : माहे मुकद्दस रमजान मुबारक में मुस्लिम इलाकों में रौनक बढ़ गई है। कई मुहल्ले पूरी रात रौशन होने लगे हैं। तीसरा रोजा पूरा होते ही अब इफ्तार का सिलसिला शुरू हो गया है। अभी तक मस्जिद और मदरसों में इफ्तार का सामान भेजा जाता था। अब लोग अपने घरों में रोजेदारों को बुलाने लगे हैं।

रमजान मुबारक पर कव्वाली भी
शहर के अटाला, रसूलपुर, रोशनबाग, गुलाबबाड़ी, रानीमंडी, सेवई मंडी, कोल्हनटोला, बक्शीबाजार, करेली, नूरुल्ला रोड, अकबरपुर, निहालपुर में कई जगह फजिर की नमाज के बाद लाउडस्पीकरों पर रमजान मुबारक पर कव्वाली बज रही है। इसी प्रकार असर की नमाज के बाद कव्वाली की गूंज सुनाई पड़ने लगी है। चौक सब्जीमंडी, नूरुल्ला रोड, अटाला, रसूलपुर और अकबरपुर में आधी रात तक रोजदारों की भीड़ जमा हो रही है। यही वजह है कि यहां सहरी के वक्त तक चाय, नाश्ते की दुकानें खुल रही हैं। अटाला में कई लोगों ने अपने घरों में इफ्तार का आयोजन कर मस्जिद और मदरसे के मौलानाओं को बुलाया।

जुमे की नमाज को मस्जिदों में नमाजियों की भीड़
शुक्रवार को जुमा पर मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ उमड़ी, मस्जिदों की छतों और बाहर टेंट आदि लगवाए गए थे। इस दौरान वहां अकीदत का माहौल था। सभी ने खुदा की इबादत कर विश्व कल्याण की कामना की।

मेरा पहला रोजा

तारा खान ने बताया कि मैंने नौ साल की उम्र में पहला रोजा रखा था। तब से पूरा रोजा रखती हूं। एक बार बीमार पड़ने की वजह से मेरा रोजा छूटा था। उसका बहुत ही अफसोस है। भाई बहनों में सभी रोजा रखते हैं। पति पूरा रोजा नहीं रखते। मेरी कोशिश होती है कि वह भी 30 रोजा रखें। मो. अफजाल के मुताबिक मैं आठ साल की उम्र से रोजा रख रहा हूं। रोजा कभी भी नहीं छूटा। पांचों वक्त की नमाज भी पढ़ता हूं। अल्लाह का फजल है कि मेरा रोजा नहीं छूटा। रमजान के अलावा भी मैं शबेरात, मोहर्रम के रोजे रखता हूं। मेरी कोशिश रहती है कि पूरा परिवार नमाजी और रोजदार बने। परिवार के बच्चों को भी मैं यही सिखाता हूं।

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