प्रयागराज, जेएनएन। बारिश का मौसम गुजर चुका है। इस दौरान प्रयागराज से लेकर प्रतापगढ़ और कौशांबी जनपद में दो दर्जन से ज्यादा जर्जर मकान ढहे जिसकी वजह से मलबे में दबकर कई लोगों की जान चली गई। प्रयागराज में भी शहर और ग्रामीण इलाके में कई लोगों की ऐसी घटनाओं में मौत हुई है।  इसके बावजूद शहर की घनी बस्तियों में स्थित वर्षों पुराने जर्जर भवनों को उनके मालिकों ने गिराने की कवायद शुरू नहीं की है। हर साल नगर पालिका बारिश से पूर्व जर्जर भवनों का सर्वे व मकान मालिकों को नोटिस जारी तो करती है लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं होती। न भवनों को खाली कराया जाता है और न इन्हें गिराया जाता है। ऐसे में नगर पालिका ने  निर्णय लिया है कि अगर जर्जर भवन ढहा तो भवन स्वामियों पर ही एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। प्रयागराज में भी पुराने शहर में कई मकान मालिकों को नोटिस भेजा जा चुका है लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

तेज हवा चलने पर भी हिलने लगते हैं जर्जर मकान

प्रतापगढ़ शहर में ऐसे दर्जनों मकान हैं, जो पूरी तरह जीर्णशीर्ण हो चुके हैं। इसमें नगर पालिका क्षेत्र के बेगम वार्ड, चौक, जेल रोड, बाबागंज, धर्मशाला वार्ड सहित कई जगहों पर जर्जर भवन हादसे को दावत दे रहे हैं। अबकी बारिश में ही कई मकान ढहे और लोगें की जान गई। जानकार बताते हैं कि इन मोहल्लों में दर्जनों भवन सालों पुराने होने से जर्जर हो चुके हैं। इनसे कभी भी ढहने का डर बना रहता है। तेज बारिश और आंधी में ऐसे जर्जर भवन और कच्चे मकान हैं, जिनकी दीवारें पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। सामान्य दिनों में तेज हवा के चलने मात्र पर इन भवनों में कंपन होता है।

ईओ मुदित सिंह ने जर्जर भवन के स्वामियों को कई बार नोटिस दी है। उनको सचेत किया गया है। यह भी कहा गया है कि अगर कोई हादसा हुआ तो संबंधित भवन स्वामी इसके जिम्मेदार होंगे। उन्हीं के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।

Edited By: Ankur Tripathi