प्रयागराज :पंडित केशरीनाथ त्रिपाठी के जन्मदिन समारोह में उमड़ी भीड़ देख गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने कहा कि अधिकांश यह देखा जाता है कि जन्मदिन में लोग जाते तो हैं लेकिन सिर्फ खानापूर्ति करके कुछ ही देर में लौट जाते हैं लेकिन यहां तो कोई उठने का नाम ही नहीं ले रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पंडित जी को लोग कितना चाहते हैं। राजर्षि टंडन मंडपम में शनिवार को आयोजन समिति की ओर से पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी का 85वां जन्म दिवस समरोह का आयोजन किया गया था। इसमें गृहमंत्री, डिप्टी सीएम समेत कई माननीय शामिल हुए। पंडित त्रिपाठी को बधाई देने के लिए लोगों की लंबी लाइन लगी रही। कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि पंडित जी ने राजनीति को अपना प्रोफेशन नहीं बनाया, इसीलिए वह आज यहां तक पहुंचे हैं। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि आज यहां चिराग से सूरज के बारे में बोलने के लिए कहा जा रहा है, जो हमारे लिए कठिन है। उन्होंने कहा कि जब मैं विधानसभा में प्रवेश करता हूं तो वहां की दीवारें त्रिपाठी जी के बारे में कुछ कहती हैं। उन्होंने यहां एक देश-एक चुनाव कराने की बात कही। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि 41 वर्षो से मैं पंडित जी को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। इनसे हम लोग बहुत कुछ सीखते हैं। अध्यक्षता न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय ने की। कार्यक्रम के आखिरी चरण में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी शामिल हुए। आयोजन समिति के पदुम जायसवाल, शिवेंद्र मिश्र व बब्बू राम द्विवेदी ने अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर सांसद श्यामाचरण गुप्ता, फूलपुर सांसद नागेंद्र सिंह पटेल, एमएलसी सुरेश त्रिपाठी, यज्ञदत्त शर्मा, राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह, सुबोध सिंह, एलएस ओझा, नरेंद्रदेव पांडेय, रमाशंकर शुक्ल, शशि वाष्र्णेय आदि मौजूद रहे। महामना, राजर्षि टंडन की एक धारा केशरीनाथ भी :

प्रयाग की बड़ी अनूठी परंपरा है। यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है। गंगा की धारा सफेद और यमुना की धारा श्यामल है। इसलिए यहां के लोगों के सामान्य जीवन में भी इन दोनों नदियों का गहरा प्रभाव है। यह बातें बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन ने शनिवार को राजर्षि टंडन मंडपम में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के 85 वें जन्मदिवस समारोह में कही। उन्होंने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय और राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हीं की एक धारा केशरीनाथ त्रिपाठी हैं। इनकी कार्य कुशलता और वाक पटुता के कारण ही स्पीकर के रूप में राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के बाद इनका नाम दूसरे स्थान पर बताया। अंत में उनकी शतायु के लिए शुभकामना दी। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में देश में आतंकवादियों, माओवादियों और नक्सलियों के खिलाफ हो रही बड़ी कार्रवाई का भी जिक्र किया। राजनीति में विनम्र होना जरूरी : केशरीनाथ :

मैं भाषण नहीं, धन्यवाद देने के लिए डायस पर आया हूं। राजनाथ सिंह और लालजी टंडन ने अपने साथ किए गए कार्यो का जिक्र किया। आशीर्वचन के रूप में मुझे जो पूंजी यहां मिली है, वह खत्म होने वाली नहीं है। यह बातें केशरी नाथ त्रिपाठी ने अपने जन्मदिन समारोह में कहीं। उन्होंने राजनीतिज्ञों को सीख देते हुए कहा कि राजनीति में रहना है तो अहंकार को छोड़ना होगा। इसके लिए विनम्र होना बहुत जरूरी है। कार्यकर्ताओं को सही मार्गदर्शन देना नेताओं का काम है। इससे कार्यकर्ताओं में उनके प्रति श्रद्धा का भाव आएगा। कहा कि 1952 में जब राजनीति में आए तो यह सब ज्ञान नहीं था। धीरे-धीरे यह अनुभव हुआ। जन्मदिन पर मिले स्नेह के लिए प्रयागराजवासियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह जन्मदिवस नहीं, बल्कि प्रेरणा दिवस है।

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