प्रयागराज, जेएनएन। हिंदी-उर्दू साहित्य को संरक्षित करने के लिए स्थापित हिंदुस्तानी एकेडमी अब नाथ संप्रदाय के प्रणेता गुरु गोरखनाथ के विचारों को संग्रहीत करेगी। गोरखनाथ ने जहां-जहां भ्रमण किया है, जो उपदेश दिए हैं, उसका ब्योरा जुटाया जा रहा है। उनसे जुड़ी पांडुलिपियां व पुस्तकें भी खोजी जाएंगी। पांडुलिपियों को एकत्र करके हिंदी के विद्वानों से अध्ययन कराया जाएगा। फिर एकेडमी उसके मर्म पर आधारित 'गोरख बानी' नामक पुस्तक प्रकाशित करेगी। पुस्तक के जरिए गोरखनाथ के उपदेशों का देशव्यापी प्रचार-प्रसार होगा। साथ ही उनसे जुड़ी पुस्तकों को प्रमुख पुस्तक मेला में प्रदर्शित कराया जाएगा। 

 नाथ संप्रदाय के प्रणेता थे गुरु गोरखनाथ

गुरु गोरखनाथ का दौर 9वीं शताब्दी का माना जाता है। वह जिस नाथ सम्प्रदाय के प्रणेता माने जाते हैं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उसी संन्यास परंपरा से आते हैं। संस्कृत के अलावा ङ्क्षहदी में गोरखनाथ ने काफी प्रवचन किए। नेपाल के अलावा भारत में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब व दक्षिण भारत का भ्रमण करके लोगों को सनातन धर्म से जोडऩे में अहम भूमिका निभाई थी।  

स्थानीय साहित्यकारों की मदद लेगी एकेडमी

हिंदुस्तानी एकेडमी गुरु गोरखनाथ से जुड़ी पांडुलिपियों व पुस्तकों को एकत्र करने व अध्ययन के लिए स्थानीय साहित्यकारों की मदद लेगी। इसमें नेपाल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब के अलावा दक्षिण भारत के वरिष्ठ साहित्यकारों को भी लगाया जाएगा। हर राज्य से पांच-पांच साहित्यकारों की टीम काम करेगी। साहित्यकारों की नियुक्ति का काम अंतिम दौर पर पहुंच गया है। 

दर्जनभर विद्वान करेंगे शोध

पांडुलिपियों को एकत्र करने में दर्जनभर हिंदी के विद्वानों को लगाया जाएगा। वह पांडुलिपियों का अध्ययन करने के साथ गोरखनाथ के कृतित्व-व्यक्तित्व पर शोध करेंगे। फिर उसे जन-जन तक पहुंचाने का अभियान शुरू होगा।

संगोष्ठी का होगा आयोजन

गुरु गोरखनाथ के नाम से हिंदुस्तानी एकेडमी में संगोष्ठी होगी। उनकी जयंती पर भी एकेडमी में आयोजन होंगे, जिसमें साहित्यकार व धर्माचार्यों को भी बुलाया जाएगा।

गोरखनाथ के नाम से पुरस्कार

एकेडमी ने गुरु गोरखनाथ के नाम से साहित्यिक पुरस्कार देने जा रही है। एकेडमी का सबसे बड़ा पांच लाख रुपये का पुरस्कार उनके नाम से दिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

बोले हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष

हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह कहते हैं कि गुरु गोरखनाथ का आचरण, विचार व संस्कार प्रेरणादायी है। वह ऐसे संत थे जिन्होंने ङ्क्षहदी भाषा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। 'गोरख बानी' के जरिए लोगों को उससे जोड़कर आचरण व विचार में शुद्धता लाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

 

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Posted By: Brijesh Srivastava

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