प्रयागराज, जेएनएन। रामपुर पब्लिक स्कूल के ध्वस्तीकरण के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से अवैध स्कूलों के खिलाफ हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने पूछा है कि रामपुर में कानून के विपरीत बने अन्य स्कूलों पर भी कार्रवाई हो रही है या केवल आजम खां से संबंधित रामपुर पब्लिक स्कूल के खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है। कोर्ट ने जानकारी मांगी है कि रामपुर में कानून के विरुद्ध बने कितने स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने पब्लिक स्कूल प्रबंध समिति की याचिका पर दिया है। याचिका पर सुनवाई 29 अगस्त को होगी। याची अधिवक्ता सफदर काजमी ने बताया कि कोर्ट ने रामपुर विकास प्राधिकरण के ध्वस्तीकरण को लेकर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर पहले ही रोक लगा रखी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को स्कूल के खिलाफ कार्रवाई पत्रावली भी पेश करने का आदेश दिया है।

दरअसल, आजम खां की तरफ से दलील दी गई कि तमाम लोगों के मकान, स्कूल और दुकानें उनसे भी आगे हैं, लेकिन अथॉरिटी सिर्फ उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। अदालत ने इसी बिंदु पर अथॉरिटी से जवाब दाखिल करने को कहा है। अथॉरिटी के सचिव खुद भी सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद थे।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी को अगले 10 दिनों तक रामपुर पब्लिक स्कूल के अवैध निर्माण मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने को कहा है। इसके साथ ही अदालत ने अथॉरिटी से 10 दिनों में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। हालांकि अदालत ने अथॉरिटी के आदेश पर रोक लगाने की आजम खां की अपील को फिलहाल ठुकरा दिया है। 29 अगस्त को इस मामले में फिर से सुनवाई होगी।

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