ज्ञानेंद्र सिंह, प्रयागराज : मैं संगम हूं, इस दिव्य और भव्य कुंभ की आभा से आह्लादित हूं। आध्यात्मिक आनंद में डूबा हूं। हमारे वैभव में हिलोर मार रहीं आस्था की लहरों ने इतिहास के साथ भूगोल को भी बदल दिया है। युगों-युगों से चले आ रहे कुंभ को हमने देखा है और कुंभ ने हमें। मगर इस बार के भव्य और दिव्य कुंभ ने हमें जो ऊंचाई प्रदान की है, वह अविस्मरणीय है।

राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत कई वीवीआइपी संगम में डुबकी लगाई है

यह बातें संगम की हैं, जो काल्पनिक तो हैं मगर वास्तविकता को समेटे हैं। हां, इस बार के कुंभ ने संगम को वास्तव में विहंगम बनाया। देश और दुनिया के लगभग 22 करोड़ श्रद्धालु इस कुंभ में अब तक पवित्र त्रिवेणी में डुबकी लगा चुके हैं। पुण्य के गोते लगाने वालों में इस बार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, आठ राज्यों के राज्यपाल, सात राज्यों के मुख्यमंत्री समेत 54 केंद्रीय और विभिन्न राज्यों के मंत्री भी डुबकी लगा चुके हैं। संगम में डुबकी और दिव्य-भव्य कुंभ की याद समेट कर गए अप्रवासी भारतीय भी कुंभ का डंका दुनिया में बजा रहे हैं।

मॉरीशस के पीएम व कैबिनेट के साथ सीएम संगम स्‍नान कर चुके हैं

मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने भी परिवार और सीएम अपनी कैबिनेट के साथ संगम स्नान किया। केंद्र के विभिन्न विभागों के सचिव, कई राज्यों के मुख्य सचिव, डीजीपी व प्रमुख सचिव और सचिव भी यहां आ चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो अपनी कैबिनेट के साथ ही संगम में डुबकी लगाई। मुख्यमंत्री ने देश के सभी राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों को कुंभ में आने का आमंत्रण भेजा था। आमंत्रण पत्र लेकर राज्यों में मंत्री गए थे। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर विदेश मंत्रालय की ओर से दुनिया के सभी देशों को पत्र भेजा गया था कि वे अपने प्रतिनिधि को कुंभ में भेजें। यही नहीं लगभग 3200 प्रवासी भारतीय एक ही दिन में संगम में स्नान किए।

संगम पर आस्‍था का जनसागर उमड़ पड़ा था

मौनी अमावस्या हो अथवा वसंत पंचमी का शाही स्नान। संगम पर आस्था का जनसागर उमड़ पड़ा था। यही नहीं, सामान्य दिनों में लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचे। अब भी रोज लाखों की तादाद में श्रद्धालु और पर्यटक कुंभ की आभा के आकर्षण में खिंचे चले आ रहे हैं। चार मार्च को महाशिवरात्रि के स्नान पर्व लगभग एक करोड़ लोगों के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद का कहना है कि महाशिवरात्रि तक सभी व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं को मुहैय्या कराई जाएंगी।

कुंभ ने दिया विश्व को संदेश दिया

कुंभ की इस आभा से जीवनदायिनी गंगा, श्यामल यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर आस्था की जो लहरें उठीं, वो देश के कोने-कोने से लेकर विश्व भर में कई संदेश पहुंचाती नजर आ रही हैं। वह चाहे सामाजिक चेतना, समरसता, भाई चारे, वसुधैव कुटुंबकम का हो अथवा अतिथि देवो भव का संदेश। संगम की आभा निखर चुकी है। अब संगम को चिंता है तो सिर्फ और सिर्फ गंगा और यमुना के निर्मल व अविरल जल को लेकर। साथ ही साफ-सफाई की। कुंभ के बाद भी पवित्र नदियों का जल अविरल और निर्मल बना रहे तथा स्नान घाट दुरुस्त तथा साफ-सुथरा बने रहें, इसकी ही चिंता संगम को है।

Posted By: Brijesh Srivastava