ज्ञानेंद्र सिंह, प्रयागराज : पवित्र मानी जाने वाली गंगा नदी अभी तक लोगों की प्‍यास बुझाती रही है। किसानों के खेतों को सिंचित कर रही है। अब नदियों की प्‍यास भी बुझाएगी। यानी सूख चुकी नदी वरुणा में भी जल प्रदान करेगी। गंगा दशहरा के पहले इस नदी में नहर के माध्यम से गंगा का पानी छोड़ा जाएगा। दरअसल, गंगा दशहरा पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लोग वरुणा नदी के किनारे पूजा-पाठ करते हैं।

वरुणा नदी का उद्गम तीन जनपदों की सरहद से हुआ है
वरुणा नदी का उद्गम तीन जनपदों की सरहद से हुआ है। जौनपुर, प्रयागराज और प्रतापगढ़ की सीमा पर स्थित इनऊछ ताल के मैलहन झील से वरुणा उद्गमित हुई हैं। उपेक्षा के चलते इस नदी का अस्तित्व खतरे में है। जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर से 12 किमी दूर प्रतापगढ़ व प्रयागराज की सीमा पर स्थित झील से निकलकर वरुणा नदी 202 किलोमीटर सफर तय कर वाराणसी तक जाती है।

30 किमी क्षेत्र में नदी की मनरेगा के तहत हुई थी सफाई
उद्गम स्थल से प्रयागराज में नीवी वारी तक लगभग 30 किलोमीटर तक नदी की सफाई का कार्य मनरेगा के तहत पिछले वर्ष कराया गया। कभी तटीय गावों को पेयजल व सिंचाई आदि की सुविधा प्रदान करने वाली नदी अब केवल वर्षा होने पर ही अस्तित्व में आती है। उद्गम स्थल से नीवी वारी तक खोदाई होने के बाद नदी अस्तित्व में बनी रह गई है लेकिन नीवी वारी के बाद अस्तित्व खतरे में है। इसके कारण गंगा दशहरा पर वरुणा नदी के किनारे पूजा-पाठ करने वाले लोग निराश हो उठे थे। प्रयागराज, जौनपुर, भदोही और वाराणसी के लगभग ढाई सौ गांवों के लोग वरुणा किनारे ही पूजा-पाठ करते हैं। कई स्थानों पर गंगा दशहरा मेला भी लगता है।

हंडिया के टेला स्थित नहर से गंगा का पानी वरुणा में भेजा जाएगा
 हंडिया इलाके के टेला स्थित नहर से गंगा का पानी वरुणा नदी में जाएगा। लगभग दो हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा।

गंगा से प्राचीन होने की मान्यता
मान्यता है कि वरुणा नदी गंगा से भी प्राचीन है। मान्‍यता के तहत मैलहन झील के दक्षिण पूर्व में भगवान इंद्र, वरुण, यम त्रिदेवों ने त्रिदेवेश्वर शिवलिंग स्थापित कर यज्ञ किया। देवता व ऋषियों के प्रसाद ग्रहण के उपरात हस्त प्रक्षालन से मैलहन झील भर गई। त्रिदेव ने भर चुकी मैलहन झील से नदी खोदवा कर अस्सी नदी में मिलवा दिया। इसका विस्तार से वर्णन पुराणों में भी प्राप्त होता है। फिलहाल नदी का अस्तित्व बचाने का प्रयास न किया गया तो वह दिन दूर नहीं, जब यह नदी जुबानी चर्चा में ही रह जाएगी।

खास बातें
-04 जिलों में गंगा दशहरा पर वरुणा के किनारे लोग करते हैं पूजा-पाठ
-02 हजार क्यूसेक पानी नहर में छोड़ा जाएगा, जो वरुणा में जाएगा
-03 जिलों प्रयागराज, प्रतापगढ़ व जौनपुर की सीमा से निकलती है नदी
-30 किमी उद्गम स्थल से आगे तक कराई गई नदी की सफाइ

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