प्रयागराज, जेएनएन।  अवध के इस जिले में लगातार एसपी बदलते रहे, लेकिन अपराध पर अंकुश नहीं लग सका। समय-समय पर शराब माफियाओं पर कार्रवाई ना करने को एसपी पर दबाव भी पड़ता रहा। यही नहीं, दो कैबिनेट मंत्रियों का दबाव भी कोई एसपी झेल नहीं पाते हैं। शराब माफियाओं पर कार्रवाई के बाद ही मौजूदा एसपी भी एक हफ्ते के अवकाश पर चले गए थे। हालांकि वह सोमवार को ड्यूटी पर लौट आए।

पिछले कई साल से अपराध के चलते सूबे में सुर्खियों में है प्रतापगढ़ जनपद

यह जिला पिछले कई साल अपराध को लेकर सुर्खियों में रहता है। रंगदारी, लूट, हत्या की घटनाएं ताबड़तोड़ होती रहती हैं।दो साल पहले 27 नवंबर 2018 को बांदा के एसपी रहे एस. आनंद को यहां तैनात किया गया था। उनके कार्यकाल में शातिर बदमाश तौकीर और उसके गैंग की दहशत बरकरार थी। एसपी एस. आनंद के कार्यकाल में तौकीर गैंग के अधिकांश बदमाशों को पुलिस ने जेल भेज दिया था। तौकीर को एसटीएफ लखनऊ ने छह जून 2019 को चिलबिला बाईपास पर एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। एस. आनंद के तबादले के बाद 15 जुलाई 2019 को एसटीएफ के एसपी अभिषेक सिंह को यहां भेजा गया था। उनका कार्यकाल सबसे लंबा (एक साल एक माह) रहा।

एसपी अनुराग आर्य के कार्यकाल में कुछ हद तक लगी थी अवैध शराब के कारोबार पर लगाम

अभिषेक सिंह के बाद कोई एसपी लंबे समय तक टिक नहीं पाए। 18 अगस्त को मऊ के तेजतर्रार एसपी अनुराग आर्य को यहां भेजा गया था। उनके समय में अवैध शराब के कारोबार पर काफी हद तक अंकुश लग गया था। चार महीने बाद वह खुद को बीमार बताकर लंबी छुट्टी पर चले गए थे। ऐसा माना गया कि वह अपनी काफी दबाव में थे और वह यहां पर नहीं रहना चाह रहे थे।

पांच जनवरी 2021 को एसपी शिवहरि मीणा तैनात किए गए। ढाई महीने बाद मां का निधन होने पर वह भी लंबी छुट्टी पर चले गए। फिर आइपीएस सचींद्र पटेल को कार्यवाहक एसपी के रूप में तैनात किया गया, उनका भी पांच दिन बाद तबादला हो गया। 26 मार्च को इटावा में तैनात रहे एसपी आकाश तोमर को यहां तैनात किया गया, वह भी बीमार होने की वजह से आठ दिन छुटटी पर रहे। उनके स्थान एसपी गंगापार धवल जायसवाल को प्रभारी एसपी के रूप में तैनात किया गया था। इस बीच एसपी आकाश तोमर के सोमवार को छुट्टी से लौट आने पर उनके तबादले को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया।

Edited By: Rajneesh Mishra