प्रयागराज, जेएनएन। आज लेखन कार्य में लोगों की रुचि निरंतर कम होती जा रही है लेकिन यह भी सत्य है कि लेखन व सृजन का जो महत्व रहा है, उसका आनंद कुछ और ही है। वास्तव में पुस्तकालय केवल पढऩे के ही स्थान नहीं होते, बल्कि साहित्य एवं संस्कृति के संवर्धन और प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका भी निभाते हैं, जो बड़ी बात है। यह विचार भारती भवन पुस्तकालय के 130वें स्थापना दिवस पर रविवार को भारती भवन सभागार में मुख्य अतिथि पं. बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने व्यक्त किए।

पुस्तकालय के विकास को 25 हजार रुपये धनराशि देने की घोषणा की

पूर्व राज्यपाल ने पुस्तकालय के महत्व के बारे में बताया कि उनके एक मित्र को वर्ष 1924 की एक पुस्तक की आवश्यकता थी, जो उन्हें विदेशी पुस्तकालयों में भी नहीं उपलब्ध हो पाई थी, लेकिन भारती भवन पुस्तकालय से प्राप्त कर उन्हें उपलब्ध कराई गई। ऐसे गौरवशाली पुस्तकालय के विकास के लिए पूर्व राज्यपाल ने 25 हजार रुपये धनराशि देने की घोषणा की। इलाहाबाद डिग्री कालेज के प्राचार्य डॉ. अतुल सिंह ने पुस्तकालय विज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान संचार के साधनों का उपयोग कर पुस्तकालय विज्ञान निरंतर प्रगति कर रहा है। पूर्णिमा मालवीय ने भारती भवन को प्रयागराज का गौरव बताया।

अतिथियों का स्‍वागत हुआ

इसके पूर्व समारोह की शुरुआत भारती भवन के संस्थापक लाला बृजमोहनलाल भल्ला के चित्र पर माल्यार्पण एवं 101 दीपों के प्रज्वलन के साथ हुई। पार्षद सत्येंद्र चोपड़ा एवं भारती भवन के पुस्तकालयाध्यक्ष स्वतंत्र पांडेय ने अतिथियों को माला पहनाया। भारती भवन के संस्थापक के पारिवारिक सदस्य केपी भल्ला ने आंगतुकों का भावपूर्ण स्वागत किया। पुस्कालय की मंत्री डा. मुक्ति व्यास ने आभार ज्ञापित किया।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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