प्रयागराज, जेएनएन। प्रयागराज के दशहरा मेला का अलग महत्व है। यहां शहर में शारदीय नवरात्र की षष्ठी से लेकर विजयदशमी तक नित नए मोहल्लों में रामदल निकाला जाता है। इसमें आकर्षक कलात्मक और श्रृंगार की चौकियों के साथ ही मार्गों पर आकर्षक बिजली सजावट की जाती है। रामदल में श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की शोभा देखने देर रात तक भीड़ जुटती है। वहीं एकादशी के दिन चौक पर ऐतिहासिक भरत मिलाप के हजारों लोग गवाह बनते हैं। यहां अपनी बात को विराम देते हुए एक और विशेषता हम आपको बता रहे हैं। यहां कई मुहल्लों में रामदल से एक दिन पूर्व तक काली स्वांग भी निकाला जाता है। हाथ में खप्पर और गले में मुंडमाला पहने कलाकार काली की वेशभूषा पहन सड़कों पर नृत्य करते हुए निकलते हैं तो लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है। अब इसी भव्यता के विदेशी भी कायल हो गए हैं।

काली स्वांग को शूट करने के लिए फ्रांस की टीम प्रयागराज पहुंची

श्री दारागंज रामलीला कमेटी के काली स्वांग की अनूठी परंपरा के विदेशी भी कायल हो गए हैं। यहां अभी पिछले दिनों ही ऐतिहासिक काली स्वांग के आयोजन हुए हैं। इसकी भव्यता की गूंज विदेश तक पहुंच चुकी है। काली स्वांग के आकर्षण से फ्रांस से चॉल्र्स फ्रीजर की टीम भी खिंची चली आई। टीम ने विभिन्न स्थानों पर काली स्वांग की शूटिंग की। मां काली के पात्र के रूप में रहे सचिन शुक्ला ने पूरी तैयारी से अस्त्र-शस्त्र वस्त्र को धारण कर फ्रांस से आई टीम को शूटिंग कराई। शूटिंग कई घंटे तक चली।

खुश हैं कमेटी के पदाधिकारी

श्री दारागंज रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कुल्लू यादव, महामंत्री जितेंद्र गौड़, कोषाध्यक्ष मुन्ना आजाद, काली संयोजक राहुल यादव सहित मीडिया प्रभारी तीर्थराज पांडेय ने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब लोग कहेंगे कि प्रयागराज का दशहरा नहीं देखा तो क्या देखा और उसमें मां काली का रौद्र नृत्य न देखा तो क्या देखा।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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