कड़ी मेहनत की तो मजदूर से बन गए किसान
आधुनिक खेती का प्रयोग कर यमुनापार के किसान अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना रहे हैं। मिडो सिस्टम के माध्यम से अन्य किसान भी उनसे प्रेरणा लेकर बेहतर खेती कर रहे हैं।

इलाहाबाद : मन में लगन, मेहनत व समय के साथ खुद को बदलने की चाह हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। यमुनापार के दर्जनों किसानों ने इसे साबित कर दिया है। ऐसे किसान मौसम और समय को महत्व देते हुए पारंपरिक से इतर आधुनिक खेती के तहत मिडो सिस्टम अपनाते हुए सहफसली की खेती कर न केवल अपनी तकदीर बदली बल्कि आज उनकी उन्नति देख अन्य किसान भी उनके नक्शे कदम पर चल रहे हैं। कृषि यंत्रों से मुख्य फसलों के बीच खाली जगहों में अन्य कई प्रकार की फसल उगाकर अतिरिक्त आय से अच्छा मुनाफा कमा मिसाल पेश किया है।
कौंधियारा के नौंगवा खिटिरिया गांव के युवा किसान अनिल कुमार भारतीय, गौहनिया के मौहरिया गांव के मिथुन पटेल, लवकुश सोनकर ने बताया कि परंपरागत खेती से बमुश्किल एक एकड़ में 10 ङ्क्षक्वटल धान, गेहूं का ही उत्पादन हो पाता था, जबकि खर्च भी अधिक होता था। इसके बाद खेती खाली रहती थी। अन्य आय का कोई जरिया न होने से इधर-उधर काम की तलाश करनी पड़ती थी। इसी बीच तीन वर्ष पूर्व शहर में आयोजित कृषि प्रयोगशाला में शामिल हुआ तो विशेषज्ञों द्वारा मिडो सिस्टम से सहफसली खेती के बारे में तकनीकी जानकारी मिली। तभी से सहफसली खेती शुरू कर पीछे कभी मुड़कर नहीं देखा। अमरूद, आम आदि उद्यान, बागवानी के बीच खाली जगह में धान, गेहूं, सब्जी व मक्के की फसल के साथ नेनुआ, बरबटा, कद्दू, लौकी लगा मक्के व सब्जी आदि सहफसली की खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं।
कई किसान धान कटाई के एक माह पूर्व से ही धान की फसल के बीच खाली जगहों पर धनिया लगा देते हैं जिससे नमी होने से सिंचाई नहींं करनी पड़ती। साथ ही कटाई होने के समय धनिया बाजारों में बेचे जाने लगता है। एक वर्ष में पांच से सात किस्म की सहफसली खेती कर रहे हैं। खेतों को कभी खाली नहीं रहने दिया और जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं। इससे खेतों में उर्वरक शक्ति बनी रहती है।
दो फसल लेते ही बढऩे लगी आय :
किसान दान बहादुर, अशर्फी लाल पटेल आदि ने बताया कि सहफसली खेती से एक एकड़ खेत में करीब तीन से चार लाख वाॢषक मुनाफा हो रहा है। इस वर्ष अधिकतर किसान अन्य खेत बंटाई पर लेकर खेती को बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
बच्चों को सिखाएंगे खेती के गुर :
किसानों ने कहा की सहफसली खेती से मुनाफा देख युवाओं का भी खेती के प्रति रुझान बढ़ा है। वह अपने बच्चों को शिक्षित कर उन्नत कृषि की एक नई पीढ़ी तैयार कर रहे हैं। बच्चों को अच्छी तरह पढ़ाई के साथ ही अच्छी खेती के गुर भी सिखाएंगे, ताकि वे इस विरासत को संभाल सकें।
ये है मिडो सिस्टम :
किसान अनिल भारतीय, रामवृक्ष, मिथुन पटेल बताते हैं कि मिडो सिस्टम एक ऐसी प्रणाली है जिसमें एक फसल के पौधों को खेतों में पेड़ी की तरह उचित दूरी पर लगाया जाता है। पौधों की इस सीमित दूरी के बीच में अन्य ऐसी फसल लगाई जाती हैं जो लगाई गई प्रमुख फसल से पहले ही तैयार हो जाए। इस तरह की प्रणाली खेती में उपयोग लायी जाती है। इसके साथ ही एक ही जमीन पर कई तरह की फसलों के लगने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी बढ़ती है और ङ्क्षसचाई भी कम करनी पड़ती है जिससे पानी की भी बचत होती है। मिडो सिस्टम बागवानी के बीच खाली जगह में अन्य फसले लगाने में अधिकतर लाभदायक साबित हुआ है। यह प्रणाली किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन रही है।

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