प्रयागराज, जेएनएन। प्रतियोगी परीक्षा में गलत प्रश्न या फिर सभी उत्तर विकल्पों में प्रश्न का जवाब न होना आम बात हो गई है। यह हालात तब हैं जब प्रतियोगी एक अंक से सफल या फिर असफल हो जाते हैं। इसीलिए लगभग हर परीक्षा की उत्तरकुंजी को कोर्ट में चुनौती दी जा रही है। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) की संशोधित उत्तरकुंजी शुक्रवार को जारी हुई है और अब उसके कुछ प्रश्नों के जवाब को चुनौती देने की तैयारी शुरू हो गई है, क्योंकि विषय विशेषज्ञों ने सिर्फ तीन प्रश्नों में ही उलटफेर किया है, जबकि अभ्यर्थी कम से कम छह प्रश्नों में बदलाव की उम्मीद लगाए थे।

उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षा संस्था उप्र लोकसेवा आयोग की अहम पीसीएस परीक्षा में तो लगातार तीन वर्ष गलत प्रश्न पूछे गए हैं। जिन विषय विशेषज्ञों ने प्रश्नावली तैयार की, उन्होंने ही आपत्तियां आने के बाद प्रश्नों को हटाने या फिर अधिक विकल्प मान लिए। पीसीएस में 2016, 2017 व 2018 में पूछे गए सवालों या फिर उनके उत्तर विकल्पों को विशेषज्ञों ने गलत ठहरा दिया। 2018 में ही पांच प्रश्नों को हटाया गया और कई में दो-दो उत्तर विकल्प मान लिए गए। अभी 2019 का परिणाम आना शेष है। इसी तरह से उप्र उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र आदि को भी कोर्ट के आदेश पर उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन करके चयनित बदलने पड़े हैं।

परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से होने वाली यूपीटीईटी में प्रश्नों के जवाब पर विवाद निरंतर जारी है। पिछले वर्ष तो अभ्यर्थियों ने परीक्षा में पूछे गए सभी 150 सवालों पर आपत्तियां भेज दी थीं। 2017 की यूपीटीईटी में कोर्ट के आदेश पर पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों की संख्या बदली गई। इस बार वाजिब प्रश्नों पर ही आपत्तियां आएं, इसीलिए प्रति प्रश्न आपत्ति करने का शुल्क तय हुआ। इसके बाद भी 64 प्रश्नों पर 1034 अभ्यर्थियों ने आपत्ति कर दी। हालांकि उनमें से सिर्फ तीन सवालों में ही अभ्यर्थियों को राहत मिली है। करीब इतने ही सवालों पर रस्साकशी तेज है। चर्चा है कि यह प्रकरण अगले सप्ताह ही कोर्ट पहुंचेगा, शुल्क मांगे जाने को पहले ही चुनौती दी जा चुकी है।

Posted By: Umesh Tiwari

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