प्रयागराज, जेएनएन। शहरी क्षेत्र में ई-रिक्शा का पंजीकरण बंद कर दिया गया है और अवैध रूप से चल रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इससे ई-रिक्शा विक्रेताओं में नाराजगी है। इसी मामले को लेकर शुक्रवार को वह मंडलायुक्त कार्यालय पर पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शन और नारेबाजी की जा रही है। ई-रिक्शा चालक भी मौजूद हैं। उनकी मांग है कि ई-रिक्‍शा पर प्रशासन प्रतिबंध न लगाए। इस संबंध में उचित रास्‍ता निकाला जाना चाहिए।

आरटीए की बैठक में प्रतिबंध का मंडलायुक्त ने लिया था फैसला

बता दें कि मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई सड़क परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की बैठक में पिछले दिनों ई-रिक्शा का पंजीकरण बंद करने का फैसला हुआ है। बैठक में ई-रिक्शा का मुद्दा उठाया गया। बताया कि ई-रिक्शा के चलते जगह-जगह जाम लग रहा है। अब तक करीब 58 सौ ई-रिक्शा का ही पंजीकरण है लेकिन भीड़ ज्यादा दिखती है। ई-रिक्शा की भीड़ को देखते हुए कानपुर और वाराणसी में इनके पंजीकरण पर रोक लगा दी गई है। इस पर कमिश्नर ने कहा कि प्रयागराज में भी नगर निगम की सीमा में अब ई-रिक्शा का पंजीकरण बंद कर दिया जाए। वहीं जो अवैध रूप से चल रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जाए।

सात हजार ई-रिक्शा का हो रहा संचालन पर 15 सौ का ही पंजीकरण

शहर में तकरीबन सात हजार ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैैं। इनमें से ज्यादातर अवैध रूप से चल रहे हैैं। अवैध इस तरह से कि आरटीओ कार्यालय में बमुश्किल 1500 का ही पंजीकरण है। शेष बिना अनुमति के सड़कों पर दौड़ रहे हैैं और चालक रिक्शों को जहां-तहां रोक देते हैैं, जिसकी वजह से जाम लग जाता है। बिना रजिस्ट्रेशन के सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शों के खिलाफ आरटीओ कार्यालय कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा था। स्मार्ट सिटी में ई-रिक्शों के लिए रूट का निर्धारण भी अब तक न होना जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा था।

कहा, गरीबों का बंद करो उत्‍पीड़न

मंडलायुक्‍त कार्यालय पर प्रदर्शन कर रहे ई-रिक्‍शा विक्रेताओं का कहना था कि जिला प्रशासन इस वाहन पर प्रतिबंध लगाकर गरीबों का शोषण कर रही है। कहा कि गरीबों का उत्‍पीड़न को बंद किया जाना चाहिए। कहा कि गरीब घर के बेरोजगार युवा व यहां तक की वृद्ध ई-रिक्‍शा चलाकर अपना और अपने परिवार का किसी प्रकार खर्च उठा रहे हैं। प्रशासन के ऐसे निर्णय से उनका परिवार भूखों रहने पर विवश हो जाएगा। प्रशासन को बीच का रास्‍ता निकालना चाहिए, जिससे गरीबों के पेट पर लात न लगे।

 

Posted By: Brijesh Srivastava