प्रयागराज, जेएनएन। मलिन बस्तियों व सड़क किनारे रहने वाले लोगों का इलाज करने अस्पताल खुद उन तक पहुंचेगा। स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवाएं भी वहीं पर ही उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से पहल शुरू की जा रही है।
 अधिकतर देखा जाता है सड़क के किनारे रहने वाले, ईट-भट्ठे पर काम करने वाले श्रमिक व मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग इलाज के लिए अस्पताल जाने से कतराते हैं। भले ही सरकार लोगों की सेहत को सुधारने के लिए करोड़ो रुपये खर्च कर रही हो लेकिन कुछ लोग अस्पतालों की पहुंच से दूर हैं। अब ऐसे लोगों को अस्पताल लाने के बजाय अस्पताल को ही उन तक पहुंचाने की तैयारी है।
 प्रत्येक माह में किसी एक बस्ती में स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा। इसमें कम से कम एक एमबीबीएस डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स, वार्ड ब्वाय समेत पूरी टीम मौजूद होगी। यह जरूरी नहीं होगा कि इसमें सिर्फ सरकारी डॉक्टर ही शामिल होंगे। प्राइवेट डॉक्टरों को भी इसमें शामिल किया गया है। प्रयास यह होगा कि विशेषज्ञ डॉक्टर भी इस कैंप में शामिल हों। यदि गंभीर बीमारी है तो उसे अस्पताल भी ले जाने की व्यवस्था होगी। इस कैंप से गरीब तबके लोगों को काफी राहत मिलेगी। अक्सर लोग बीमारी पता चलने के बाद भी डॉक्टर जाने में देरी करते हैं। इससे बीमारी गंभीर हो जाती है। इससे लोगों को समय से इलाज मिल जाएगा।
 इस संबंध में एसीएमओ डॉ. आशू पांडेय ने बताया कि माह में किसी न किसी बस्ती में यह कैंप लगाया जाएगा। इससे ऐसे लोगों को राहत मिलेगी जो अस्पताल जाने से कतराते हैं।

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