प्रयागराज : कर अधिवक्ता एवं कर विशेषज्ञ करदाताओं का आयकर विवरणी दाखिल करते समय आयकर अधिनियम के तहत धर्मार्थ (चेरिटेबुल) और शैक्षिक संस्थाओं को मिलने वाली छूट की शर्तों का सावधानी से परीक्षण कर लें। ताकि आयकर की छूट के प्रावधानों का दुरुपयोग न हो। यह सुझाव प्रयागराज टैक्स कांफ्रेंस के तीसरे सत्र की मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति भारती सप्रू ने दी।

 दो दिवसीय टैक्स कांफ्रेंस के समापन अवसर पर 'धर्मार्थ और शैक्षिक संस्थाओं के कर निर्धारण एवं नोटबंदी के बाद उत्पन्न परिस्थिति' विषय पर आयोजित तीसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमलता बंसल ने की। रानो जैन, शिल्पी सत्यप्रिय सत्यम, वीपी गुप्ता, एके श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर विचार रखे। चौथे तकनीकी सत्र में 'कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीडऩ' विषय पर चर्चा हुई। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो.गीतिका ने की। सुमित्रा चौधरी, अंजू जैन, शिल्पी और प्राची मिश्रा (2012 की मिस इंडिया) प्राची मिश्रा ने कार्यस्थलों पर बढ़ते महिला उत्पीडऩ पर चिंता जताई। कहा कि उत्पीडऩ के खिलाफ महिलाओं को मुखर होना होगा। सत्र का संचालन पूजा तलवार ने किया।

 अंतिम सत्र के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने 'वस्तु एवं सेवा कर के तहत सर्वे, अभिग्रहण, गिरफ्तारी एवं पेनॉल्टी' विषय पर संबोधित किया। कहा कि इस मसले पर कर अधिवक्ता और कर विशेषज्ञ अधिक मंथन करके ही सुझाव दें, ताकि करदाताओं को किसी तरह की परेशानी न होने पाए। इस सत्र की अध्यक्षता हैदराबाद के डॉ.एम वी के मूर्ति ने की। धर्मेंद्र श्रीवास्तव, राकेश अग्रवाल, डॉ. नवीन रतन, तरुण गुलाटी ने भी विचार रखे। सत्र का संचालन बेंगलुरु के सिद्धेश्वर यलमालि ने किया। बिशप जानसन स्कूल के सभागार में समारोह आयोजित था।

Posted By: Brijesh Srivastava

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