इलाहाबाद (जेएनएन)। माघ मेला में संगमनगरी में आज मौनी अमावस्या महास्नान पर्व की पुण्यबेला में त्रिविधि ताप-पाप नाशिनी त्रिवेणी के आंचल में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। दिन में 12 बजे तक करीब दस से 12 लाख श्रद्धालु ठंड के मौसम में भी पुण्य की डुबकी लगा चुके थे। शाम तक करीब डेढ़ करोड़ से भी ज्यादा श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाएंगे।

माघ मास के प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्था पर आज तड़के से ही संगम में डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हो गया। इसके बाद तो आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। दिन बढऩे के साथ ही भीड़ संगम पर बढ़ती ही जा रही थी। अधिकतर श्रद्धालुओं ने जौ और तिल हाथ में लेकर लोगों ने डुबकी लगाई।

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प्रमुख संतों में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, स्वामी वासुदेवानंद, स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, किन्नर अखाड़ा संस्थापक ऋषि अजय दास, आचार्य पीठाधीश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने भी स्नान कर सूर्यदेव को जलांजलि अर्पित की। इलाहाबाद में संगम के अलावा अक्षयवट घाट, रामघाट, मोरी मार्ग, गंगोली शिवाला गंगा घाट पर भी श्रद्धालुओं का जमघट रहा। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह भंडारा का आयोजन हुआ। हालांकि, देर रात ही मौसम बदल गया और बारिश होने से ठंड बढ़ गई. इसके बावजूद श्रद्धालुओं ने माघ मास के प्रमुख स्नान पर्व पर आस्था की डुबकी लगाई। डीएम संजय कुमार के मुताबिक, डेढ़ से दो करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की उम्मीद है।

दरअसल, सदियों बाद इसका पुण्य योग 24 घंटे से ज्यादा समय तक रहेगा। आज तीर्थराज प्रयाग में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में डुबकी लगाने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन स्नान-दान करने वाले इंसान का जन्म-जन्मांतर का पाप धुल जाता है।

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कल देर रात करीब एक बजे से ही स्नान दान का क्रम शुरू हो गया था। घाटों पर चार बजे के पास स्नानार्थी रात से ही डट गए थे। आज यहां हल्की बूंदाबांदी भी हुई, लेकिन इससे कोई असर नहीं पड़ा। संगम के साथ ही लोगों ने राम घाट, गंगोली शिवाला, काली सड़क, दारागंज, अरैल पर स्नान के साथ दान भी किया।

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कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

पुलिस प्रशासन ने मेले के मद्देनजर पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इन सीसीटीवी कैमरे से मेले में सुरक्षा के मद्देनजर निगरानी रखी जा रही है। पूरे मेला क्षेत्र में ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए हर कोने पर पुलिस तैनात है। स्नान क्षेत्र के साथ मेले में जाने के लिए अलग पैंटून पुल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

देखें तस्वीरें : मौनी अमावस्या पर किन्नर संतों ने भी लगाई डुबकी

मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व

महाभारत के दृष्टांत में इस बात का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि माघ मास के दिनों में अनेक तीर्थों का समागम होता है। वहीं पद्मपुराण में कहा गया है कि अन्य मास में जप, तप और दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते जितने कि वे माघ मास में स्नान करने से होते हैं। यही वजह है कि प्राचीन ग्रंथों में नारायण को पाने का सुगम मार्ग माघ मास के पुण्य स्नान को बताया गया है, विशेषकर मौनी अमावस्या को किया गया गंगा स्नान खास महत्व का माना गया है।

Posted By: Dharmendra Pandey

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