प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हनुमान जी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी व बयान देने के आरोप पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ परिवाद चलाने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने याची नवल किशोर शर्मा के अधिवक्ता मोहम्मद फारूकी और राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम एके संड को सुनकर दिया है। मालूम हो कि निचली अदालत ने याची की परिवाद चलाने की अर्जी को क्षेत्राधिकार के आधार पर खारिज कर दिया था जिसके विरुद्ध यह याचिका दाखिल की गई।

2018 में अलवर में दिए भाषण को बनाया आधार

मऊ जिले के नवल किशोर शर्मा ने याचिका में अधीनस्थ अदालतों के आदेशों को चुनौती दी है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व एजीए प्रथम एके संड ने याचिका का विरोध किया। याचिका में कहा गया है कि 28 नवंबर 2018 को राजस्थान में अलवर जिले के मालाखेड़ा में चुनावी सभा के दौरा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को लेकर जो भाषण दिया, उसे धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाला मानते हुए मऊ जिले में परिवाद दाखिल किया गया।

याचिका में सीएम योगी के खिलाफ परिवाद दर्ज करने के आदेश की मांग

याचिका में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आईपीसी की धारा 295ए, 298 ,419, 420 व 501 के तहत परिवाद दर्ज किए जाने का आदेश देने की मांग की गई है।जिसे स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए ने 11 मार्च 2022 को क्षेत्राधिकार के आधार पर खारिज कर दिया।

उस आदेश के विरुद्ध सेशन अदालत में क्रिमिनल रिवीजन दाखिल हुआ। सेशन कोर्ट ने 26 अप्रैल 2022 को उस पर हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए खारिज कर दिया। इन दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में यह याचिका दाखिल की गई।

Edited By: Ankur Tripathi

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