प्रयागराज, जेएनन। परिवार की गरीबी दूर करने के लिए तमाम युवा रोजगार के लिए परदेश जाते हैं। खासतौर पर खाड़ी देश सऊदी अरब, दुबई, बहरीन जाने का यहां क्रेज है। वजह अच्छे तनख्वाह पर नौकरी, लेकिन यह सपना सबका पूरा नहीं हो पाता। तमाम युवा मुसीबत का शिकार हो जाते हैं। कोई कैद कर लिया जाता है तो किसी को मारकरपीट कर भगा दिया जाता है।

मगर सबसे ज्यादा दुखद है अच्छी जिंदगी के ख्वाब लेकर जाने वाले युवाओं का खाड़ी देश में मारा जाना, फिर उनका शव घर तक लाना भी मुश्किल होता है। एक मामले में तो सऊदी अरब में जान गंवाने वाले युवक की लाश नहीं लाई जा सकी तो उसकी पत्नी ने कौशांबी के अधिकारी की मदद से मोबाइल पर अंतिम संस्कार होते हुए लाइव देखा था।

ऐसे ही अभागों में शामिल था राममिलन भी

करारी का राममिलन भी ऐसे ही अभागों लोगों में था। वह भी परिवार की गरीबी को दूर करने की ख्वाहिश सीने में लेकर सऊदी अरब के दम्मान में गया था। सोचा था और बोला भी था घरवालों से कि वहां मेहनत से कमाई करेगा तो पैसे भेजकर परिवार को गरीबी से छुटकारा दिला देगा। लेकिन उसे बड़ा झटका तो तभी लगा जब दम्मान जाने पर उसे कोई अच्छा काम नहीं बल्कि मदरसा में सफाई पर लगा दिया गया। इससे राममिलन के साथ ही उसके परिवार के लोग  भी दुखी थे, फिर 40 रोज पहले हार्ट अटैक से वह चल बसा और अब मुश्किल उसकी लाश यहां लाई जा सकी है।

कोरोना से मौत के बाद नहीं लाया जा सका सऊदी से शव

अभी पिछले दिनों कौशांबी के ही एक शख्स की सऊदी अरब में काम करने के दौरान अचानक मौत का मामला सामने आया था। तब पत्नी ने काफी गुहार लगाई तो कौशांबी के एक अधिकारी ने अपने प्रयास से उसे सऊदी में पति का अंतिम संस्कार होते मोबाइल पर दिखाने का इंतजाम किया। बताया गया कि पति की मौत कोरोना से हो गई थी इसलिए शव को लाया नहीं जा सकता। और इस तरह इस परिवार का बेटा सपने देखते हुए दुनिया से चला गया साथ ही परिवार को भी गरीबी की मुसीबत से निजात नहीं मिल सकी।

Edited By: Ankur Tripathi

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