इलाहाबाद : कुंभ से पहले द्वादश माधव परिक्रमा पर जिम्मेदार अफसर और विभागों की उदासीनता के चलते संदेह के बादल मंडरा रहे हैं। पर्यटन विभाग और प्रशासन को इस दिशा में कई काम कराने थे, लेकिन अभी तक न द्वादश माधव मंदिरों की रंगाई-पुताई हो सकी है, ना ही मार्ग दुरुस्त हुए हैं। मंदिरों का चिह्नीकरण तक नहीं हो पाया है। अखाड़ों ने इस साल जुलाई में शुरू होने वाले श्रावण मास में माधव परिक्रमा का एलान किया था।

प्रयाग में द्वादश माधव की प्राचीन परंपरा वर्ष 1992 से बंद है। कुंभ 2019 के मद्देनजर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने मुख्यमंत्री के सामने द्वादश माधव की परिक्रमा पुन: शुरू कराने की मांग की थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मेला प्रशासन ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित माधव मंदिरों को चिह्नित कर उनकी रंगाई, पुताई व श्रद्धालुओं के बैठने, पीने के पानी के प्रबंध की जिम्मेदारी पयर्टन विभाग को सौंपी है। परिक्रमा मार्ग को ठीक कराने एवं अतिक्रमण हटाने का जिम्मा प्रशासन को सौंपा गया है, लेकिन अभी कोई ठोस काम नहीं हो पाया है। अधिकतर काम फाइलों में ही चल रहा है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि श्रावण मास में द्वादश माधव की परिक्रमा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चाहते हैं, फिर भी जिस तरह से कार्य कराए जा रहे हैं, उसमें नहीं लगता कि परिक्रमा आरंभ नहीं हो पाएगी। इधर पर्यटन विभाग के उप निदेशक दिनेश कुमार का कहना है कि द्वादश माधव परिक्रमा के मद्देनजर कराए जाने वाले कार्यो पर आने वाले व्यय का स्टीमेट बनाकर महानिदेशक पर्यटन को भेज दिया गया है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद धन अवमुक्त होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा।

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