प्रयागराज,जेएनएन। माघ मेला में जहां एक ओर धर्म-कर्म और दान पुण्य हो रहे हैैं, वहीं दूसरी ओर दंडी संन्यासियों में टकराव से यह वर्चस्व का अखाड़ा भी बन गया है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष स्वामी विमल देव आश्रम और इनसे अलग होकर अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद बना चुके स्वामी ब्रह्माश्रम के गुट आमने-सामने हैं। समिति की संपत्ति और संगठन पर सत्ता की चाहत ने संन्यासियों को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहां से लौटना दोनों गुटों के लिए मुश्किल डगर है।

माघ मेलें दंडी स्‍वामी नगर विवाद को लेकर चर्चा में

अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के महामंत्री रहे स्वामी ब्रह्माश्रम ने 18 जनवरी को अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद का गठन कर दिया है, जबकि स्वामी विमल देव आश्रम अब भी वर्चस्व कायम रखने की जद्दोजहद में हैं। उन पर समिति के बाइलॉज में छेड़छाड़, ब्रह्मलीन संन्यासियों के नाम पर माघ मेला क्षेत्र में मिली जमीन कल्पवासियों को बेचने का आरोप है। स्वामी विमल देव ने रविवार को उन आठों पदाधिकारियों को निष्कासित कर दिया जिन्होंने खुद को अलग कर नया संगठन तैयार किया है। करीब सप्ताह भर से माघ मेला क्षेत्र में दंडी स्वामी नगर इस विवाद को लेकर चर्चा में है, जिससे संन्यासियों के असल कार्य और दायित्व पर सवाल भी उठ रहे हैं।

दस्तावेज चोरी का आरोप

स्वामी विमल देव आश्रम ने स्वामी ब्रह्माश्रम पर 15 जनवरी को शिविर में घुसकर महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी करने का गंभीर आरोप लगाते हुए मेलाधिकारी के यहां शिकायती पत्र दिया है। सोमवार को दोनों गुटों के शिविर में प्रयागवाल थाने की पुलिस पहुंची, लेकिन विवाद सुलझ नहीं सका।

दस्तावेज पहले से ही मेरे पास

स्वामी ब्रह्माश्रम का कहना है कि पूर्व में महामंत्री होने के नाते दस्तावेज पहले से ही मेरे पास हैं। लेकिन, उन्हें लेना हो तो स्वामी विमल देव मेला प्रशासन औैर पुलिस की मौजूदगी में मुझसे प्राप्त करें। चोरी का आरोप झूठा है।

कीचड़ उछालने पर किया निष्कासित

स्वामी विमल देव आश्रम का कहना है कि कल्पवासियों को जमीन बेचने और बाइलॉज में छेड़छाड़ का आरोप निराधार है। आठ पदाधिकारियों का निष्कासन इसलिए किया, क्योंकि वे मुझ पर और समिति पर कीचड़ उछाल रहे हैं।

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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