प्रयागराज,जेएनएन। लॉक डाउन ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के कारोबारियों को भारी चपत लगाई है। अधिकांश व्यापारियों का करोड़ों रुपये फ्रिज, एसी, कूलर, पंखे की खरीद में फंस गया है। बैंक की सीसी लिमिट पर ब्याज, स्टाफ की सैलरी, किराया, बिजली बिल आदि में छूट के लिए शासन और प्रशासन से अभी तक कोई नीति भी नहीं आई है। दैनिक जागरण से हुई ऑनलाइन बातचीत में इलेक्ट्रॉनिक कारोबारियों ने अपनी व्यथा खुलकर बताई।

हमारे साथ ग्राहकों की भी तकलीफें हैं

आशा एंड कंपनी, जानसेनगंज के प्रवीण मालवीय ने बताया कि व्यापार शून्य है। बहुत नुकसान हुआ है। हम प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं, प्रशासन भी हमारा सहयोग करे। हमारे साथ ग्राहकों की भी तमाम जरूरतें हैं। कम से कम इतना ही हो जाए कि हमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की होम डिलेवरी की अनुमति मिल जाए।

इस सीजन में बाजार पूरी तरह खत्म

 केके सेल्स प्राइवेट लिमिटेड, सिविल लाइन के केके श्रीवास्तव का कहना है कि इलेक्ट्रिकल का व्यापार पूरा खत्म हो गया। अब तक कूलिंग का व्यापार भी 60 प्रतिशत खत्म हो गया है। हम लोग गर्मी के सीजन के लिए फरवरी या मार्च से सामान खरीदते हैं। वह पूरा पैसा जाम हो गया है। हमारे लिए भी कोई नीति बननी चाहिए। 

हो चुका है 95 प्रतिशत नुकसान

लकी ट्रेडर्स, राजरूपपुर के मिथिलेश सिंह का कहना है कि अप्रैल, मई और जून इलेक्ट्रानिक्स बाजार के लिए अहम होते हैं। अब तक 95 प्रतिशत नुकसान हो चुका है। डिस्ट्रीब्यूटर माल भेजने को तैयार हैं लेकिन, वो लोडर का चालान होने से डर रहे हैं। एसी, फ्रिज, कूलर, पंखे का व्यापार 15 मई तक ही हो पाता है।   

कोई योजना बनाए प्रशासन

भार्गव एजेंसी, कमला नेहरू रोड राजीव रत्न भार्गव ने बताया कि हमारा तो बैटरी का कारोबार है। गर्मी के दिनों में बैटरी की सेल ज्यादा होती है। बैटरी भी आवश्यक वस्तु ही है। व्यापार पूरी तरह से ठप है। प्रशासन को चाहिए कि समाज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दुकानें खुलवाने की कोई योजना बनाए।

पैसा हुआ जाम

मेगा इलेक्ट्रॉनिक विजय कुमार अग्रवाल के मुता‍बिक गर्मी के सीजन के लिए एसी, कूलर, पंखे की खरीद जनवरी में ही कर लेते हैं। वह पैसा जाम हो गया है। स्टॉक भी अब निकलने की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। कर्मचारियों को सैलरी देने में दिक्कत आने लगी है। दुकानें सशर्त ही सही, खुलनी चाहिए। 

दुकाने खोलने से आसान होंगे कई काम

जैन इलेक्ट्रॉनिक सिविल लाइन के अनूप चंद्र जैन का कहना है कि इलेक्ट्रानिक बाजार खोलने की अनुमति जिला प्रशासन को देनी चाहिए। इससे कई काम आसान होंगे, अर्थव्यवस्था कुछ पटरी पर लौटेगी, लोगों की जरूरतें पूरी होंगी, कर्मचारियों को समय पर सैलरी मिल सकेगी, व्यापारी भी नुकसान से कुछ हद तक बच पाएंगे।

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