प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट में अब आठ जून से न्यायिक कार्य शुरू होगा। अभी तक कोविड-19 व लाकडाउन के कारण अदालतों में सुनवाई नहीं हो रही थी। इसके लिए न्यायमूर्तियों व स्टाफ की न्यूनतम संख्या के साथ विशेष पीठ बैठेगी। तीन जून से मैनुअल दाखिले भी शुरू होंगे। कार्य दिवस में भी याचिकाएं दाखिल की जा सकेंगी। यह व्यवस्था इलाहाबाद हाई कोर्ट की प्रधान पीठ व लखनऊ खंडपीठ दोनों में लागू की जा रही है।

निबंधक शिष्टाचार आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि स्टैंप रिर्पोटिंग सेक्शन में दाखिला होगा, जिसके लिए अलग से स्थान निश्चित किया गया है। ई-मोड से पुराने मुकदमों में अर्जेंसी अर्जियां स्वीकार की जाएंगी। यदि याचिका में डिफेक्ट रह गया है तो भी रिपोर्टिंग सेक्शन में फाइल नहीं रखी जाएगी। उसे भी सीधे कोर्ट में भेजा जाएगा। प्रत्येक अनुभाग से सभी फाइलों को सैनिटाइज करके कोर्ट में भेजा जाएगा। वकीलों के लिए परिसर में प्रवेश के अलग से गेट निर्धारित हैं। वकीलों का प्रवेश ई-पास के जरिए होगा। 65 वर्ष से अधिक की आयु वाले वकील परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। उन्हेंं वीडियो कांफ्रेंसिंग से बहस की सुविधा मिलेगी।

वकीलों के चैंबर कैंटीन बंद रहेंगे। सभी वकीलों और स्टाफ को मास्क पहनना अनिवार्य होगा। उन्हें शारीरिक दूरी का पालन करना होगा। न्याय कक्ष में किसी भी दशा में छह से अधिक वकील मौजूद नहीं रहेंगे। हॉटस्पॉट एरिया में रहने वाले वकीलों को न्यायालय में आने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिलेगी। परिसर में थूकना दंडनीय अपराध होगा।

प्रत्येक प्रवेश द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही प्रवेश की अनुमति मिलेगी। इलाहाबाद और लखनऊ में सीएमओ और मेडिकल स्टाफ मदद के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। परिसर का नियमित सैनिटाइजेशन होगा। कोर्ट आने वाले अधिवक्ताओं को अपने वाहन पार्किंग दूर-दूर करनी होगी। ई-दाखिला एवं शारीरिक रूप से उपस्थित होकर दोनों दाखिले चालू रहेंगे।

पोलो ग्राउंड के पास पास सेक्शन व वादकारियों के शेड में सिविल क्रिमिनल व सभी प्रकार की अर्जी दाखिल होगी। हलफनामा न दे पाने की स्थिति में अंडरटेकिंग देनी होगी। गेट नंबर तीन और गेट नंबर एक से वकीलों को परिसर में प्रवेश मिलेगा। कोर्ट में बहस की जा सकेगी और मांगने पर वकीलों को वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा दी जाएगी। न्यायालय परिसर में स्टाफ को गेट नंबर तीन-बी से प्रवेश दिया जाएगा। कोरोना कमेटी के सुझाव पर मुख्य न्यायाधीश के आदेश से यह गाइडलाइन महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव द्वारा जारी की गई है।

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