प्रयागराज, जेएनएन। कोरोना के कहर और किसी बड़ी बीमारी ने प्रयागराज के लोगों के लिये पहली बार ऐसे हालात पैदा किये हैं कि अस्पतालों का जाल बिछाने पर भी महामारी नहीं रुक रही है। लोग मरीजों को लेकर भटक रहे हैं, अस्पतालों की हर एक बेड के लिये दावेदारों की लंबी लाइन है। कई मरीजों का रास्ते मे दम टूट रहा है कुछ लोगों की सांसें लिक्विड ऑक्सीजन के सहारे चल रही है। इन हालातों में चिकित्सा व्यवस्था ही बेपटरी होती जा रही है।

कोविड संक्रमितों को भर्ती करने के लिये शहर में 12 निजी अस्पतालों के जाल बिछाया जा चुका है। इनमे किसी मे 70 से 100 तो किसी मे 100 से अधिक बेड का इंतजाम है। सरकारी व्यवस्था के तहत स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में 600 और बेली अस्पताल में 200 बेड कर दिए गए हैं फिर भी हाहाकार मचा है। सैकड़ों मरीज अपने घरों में लिक्विड ऑक्सीजन के सहारे जीवन मौत से संघर्ष कर रहे हैं। लोगों को अस्पताल में अपने मरीजों को भर्ती कराने के लिये न जाने कहाँ कहाँ से सोर्स तक लगाना पड़ रहा है।

कोरोना के पीक टाइम का भी डर

आईआईटी कानपुर के शोध पिछले दिनों इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमे मई माह में कोरोना का पीक टाइम आने का दावा किया गया है। इसमें कितना दम है यह तो कोई नहीं कह पा रहा लेकिन जिस तरह से संक्रमण अपने पांव पसारता जा रहा है उससे अप्रैल माह के अगले नौ दिनों में ही स्थिति विकट होने के आसार हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा अब तक हुए इंतेजाम बौने साबित हो रहे हैं।

सीएमओ बाेले, जल्‍द समस्‍या का होगा समाधान

सीएमओ प्रयागराज डॉक्टर प्रभाकर राय का कहना है कि अस्पतालों में बेड बढ़ाये जा रहे हैं। माह के अंत तक 30 निजी अस्पतालों की व्यवस्था की तैयारी चल रही है। संक्रमित ज्यादा हैं और उस हिसाब से बेड पर अभी ऑक्सीजन सप्लाई नहीं है इसलिये कुछ दिक्कतें भी सामने हैं। जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। लोग धैर्य बनाये रखें।

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