प्रयागराज, जेएनएन। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने की खातिर जहां लोग लॉकडाउन में भी बिना किसी कारण बाहर घूम रहे हैं, वहीं संगमनगरी प्रयागराज में पूर्व राज्यपाल जस्टिस अंशुमान सिंह ने अमेरिका से लौटे अपने बेटे को एयरपोर्ट से ही वापस लौटा दिया। राजस्थान के साथ ही गुजरात के भी राज्यपाल रहे राजस्थान के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर अमल करके नेताओं के साथ प्रशासनिक अधिकारियों को आइना दिखाने का काम दिया है।

कोरोना से जंग सजगता से ही जीती जा सकती है। सबसे अहम देश के दूसरे संक्रमित शहरों से तथा विदेश से आए लोगों को होम क्वारंटाइन को लेकर है। दरअसल, विदेश से आने वाले लोगों से संक्रमण का खतरा ज्यादा है। प्रयागराज में जस्टिस अंशुमान सिंह का कदम लॉकडाउन में उनके लिए मिसाल है जो आपाधापी में घरों को जा रहे हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए देश में 21 दिन के लाकडाउन के दौरान ही लोग पैदल ही अपने घरों की ओर निकल पड़े हैं। इसके बीच सरकार लगातार अपील कर रही है कि जो, जहां है, वहीं पर रहें। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार यह अपील लोगों का जीवन बचाने के लिए कर रही है। ऐसे लोगों के लिए सरकार ही नहीं समाज भी सेवा में जुट गया है। जस्टिस अंशुमान सिंह चार वर्ष आठ महीने तक राजस्थान के राज्यपाल रहे।

लाकडाउन का उल्लंघन न हो और कोरोना के संक्रमण का खतरा न बढ़े, इसलिए पूर्व राज्यपाल जस्टिस अंशुमान सिंह ने अमेरिका से आए अपने बेटे को चेन्नई एयरपोर्ट से ही वापस अमेरिका लौटा दिया। राजस्थान के साथ ही गुजरात के भी राज्यपाल रहे राजस्थान के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अंशुमान सिंह के बेटे ने भारत लौटने के लिए करीब छह महीना पहले ही फ्लाइट का टिकट बुक करा लिया था।

मिशन रोड पर रहने वाले पूर्व राज्यपाल जस्टिस अंशुमन सिंह ने अपने बड़े बेटे अरुण प्रताप सिंह तथा उनके परिवार को घर आने से रोक दिया। अरुण अमेरिका में नार्थ कोईराला स्टेट के रोली शहर में रहते हैं। वहां पर मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी के साथ बिजनेस भी करते हैं। अरुण की पत्नी जया सिंह एक कॉलेज में जॉब करती हैं, जबकि बेटा सिद्धार्थ पढ़ाई कर रहा है। अरुण की बेटी अनु सिंह सेंट जियागो में पढ़ाई करती हैं। अरुण अपनी पत्नी के साथ 14 मार्च को चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचे। दरअसल, पूर्व राज्यपाल की पत्नी चंद्रावती देवी बीमार हैं। अमेरिका में रहने वाले बेटे अरुण उन्हें देखने के लिए आए थे।

पूर्व राज्यपाल ने बेटे को चेन्नई एयरपोर्ट से बाहर न निकलने की सलाह दी और अमेरिका लौटने को बोल दिया। अरुण भी पिता की बात को गंभीरता से लिया। मां को वीडियो कॉलिंग पर देखा और प्रणाम किया। अरुण के पास अमेरिका लौटने का टिकट 20 मार्च का था। वह फौरन लौटने के लिए काफी परेशान हुए मगर फ्लाइट नहीं मिल सकी। दूसरे दिन वह मुंबई पहुंचे। वहां चिकित्सकीय जांच हुई। इसके बाद वह दिल्ली गए, जहां तीन दिन रहने के बाद 20 मार्च को अमेरिका के लिए रवाना हुए। अगले दिन उन्होंने पिता अंशुमान सिंह को भारत से लेकर अमेरिका तक में कोरोना को लेकर बरती जा रही सतर्कता को लेकर बात की। रविवार को भी अरुण ने पिता से बात की और खुद तथा अपने परिवार का हाल बताया। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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