यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 13, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
प्रयागराज कुंभ मेला में जूना अखाड़ा ने आठ संन्यासियों को बनाया महामंडलेश्वर
प्रयागराज कुंभ मेला क्षेत्र में जूना अखाड़ा ने आठ संन्यासियों को महामंडलेश्वर के रूप में ताजपोशी की। इस दौरान किन्नर अखाड़ा के भी संन्यासी मौजूद रहे।

जागरण संवाददाता, कुंभनगर : मकर संक्रांति शाही स्नान पर्व से पहले जूना अखाड़ा ने आठ संन्यासियों का महामंडलेश्वर पद पद पट्टाभिषेक कराया। सेक्टर 16 में गंगा तट पर बने पंडाल में मंत्रोच्चार के बीच सबका पट्टाभिषेक हुआ। नए महामंडलेश्वरों को अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने आशीष दिया। यह महामंडलेश्वर कुंभ के शाही स्नान में शामिल होंगे। पूजन में लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी सहित कई किन्नर संन्यासी भी शामिल रहे। जूना अखाड़ा से जुडऩे के बाद कुंभ मेला का यह पहला आयोजन था जिसमें किन्नर संन्यासी शामिल हुए।
जूना अखाड़ा ने स्वयं से जुड़े संन्यासियों को महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक कराया। अखाड़ा के ब्रह्मïर्षि रविशंकर जी महाराज के नेतृत्व में स्वामी प्रज्ञानंद गिरि, अनुसूचित जाति के कन्हैया प्रभुनंद गिरि, अशोकनाथ गिरि, घनश्याम गिरि, अविमुक्तानंद गिरि, गणेशानंद गिरि, खड़ेश्वरी गिरि व वैष्णवी देवी गिरि ने सर्वप्रथम पूजन किया। विधि-विधान से पूजन होने के बाद अखाड़ा के प्रमुख महात्माओं ने सबकी चादरपोशी करके पट्टाभिषेक की प्रक्रिया पूरी की। फिर अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने सबको टीका लगाकर आशीष दिया। इसके बाद उन्हें ङ्क्षसहासन पर आसीन करके छत्र-चंवर भेंट किया गया। पूजन में अखाड़ा के मुख्य संरक्षक महंत हरि गिरि, स्वामी संपूर्णानंद, लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी, जगदगुरु पंचानन गिरि, श्रीमहंत प्रेम गिरि, श्रीमहंत नारायण गिरि, विद्यानंद सरस्वती, मां भवानी, महंत पवित्रा आदि शामिल रहे।
वैष्णवी की लगती है चौकी
जूना अखाड़ा में महामंडलेश्वर बनीं वैष्णवी देवी पंजाब की चर्चित धर्मगुरु हैं। राधे मां की तरह इनकी भी चौकी लगती है। पंजाब के फगवाड़ानगर ओमकारनगर में हर मंगलवार को वैष्णवी की चौकी सजती है, जिसमें उनकी दर्शन करके आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। हर समय हाथ में त्रिशूल व बदन पर चुनरी रखने वाली वैष्णवी ने दसवीं तक पढ़ाई की है। वह दो बच्चों की मां हैं। इनके पति रामकृपाल वर्मा पेशे से व्यापारी हैं। बताती हैं 30 साल की थी तब उन्हें मां भगवती ने साक्षात दर्शन दिया। इसके बाद उनका मन वैराग्य में रम गया। मां अक्सर ज्वाला व शंकर के रूप में दर्शन देती हैं। यही कारण है कि उन्होंने मां के सिवाय किसी दूसरे को गुरु नहीं बनाया। मां से मिली शक्ति के आधार पर लोगों का भला करती हैं।
आशुतोषानंद गिरि बने महामंडलेश्वर
निरंजनी अखाड़ा के कुंभ मेला क्षेत्र स्थित शिविर में रविवार को आशुतोषानंद गिरि का महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक हुआ। मंत्रोच्चार के बीच पूजन कराने के बाद महात्माओं ने अंग वस्त्र भेंटकर उनके महामंडलेश्वर पद पर आसीन कराया। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी, श्रीमहंत आशीष गिरि आदि ने मंत्रोच्चार के बीच उन्हें माला पहनाकर चादर भेंट की। ने सबसे आशीष लेकर धर्महित में काम करने का संकल्प लिया।
केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति आज बनेंगी महामंडलेश्वर
केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का महामंडलेश्वर पद पर सोमवार को पट्टाभिषेक होगा। महामंडलेश्वर बनने वाली वह पहली केंद्रीय मंत्री हैं। जबकि निरंजनी अखाड़ा की 11वीं महिला महामंडलेश्वर हैं। प्रख्यात कथावाचिका साध्वी ऋतंभरा की गुरु बहन साध्वी निरंजन ज्योति के पट्टाभिषेक कुंभ मेला क्षेत्र के सेक्टर 16 स्थित अखाड़ा के शिविर में सुबह दस बजे आरंभ होगा। पट्टाभिषेक समारोह में 13 अखाड़ों के महात्माओं के साथ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी शामिल होंगे।
