प्रयागराज, जागरण संवाददाता। बीते अप्रैल माह में कोरोना संक्रमण के पीक पर रहने के दौरान आक्सीजन जिस तरह से कम पड़ गई थी और इसी के लिए बेड की मारामारी भी मच गई थी वैसी नौबत फिर न आने पाए इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने तेजी से काम किया है। इसमें उत्तर प्रदेश शासन ने भी भरपूर दम लगाया है। तैयारी कुछ ऐसी है कि कोरोना की तीसरी लहर आए भी तो आक्सीजन के लिए किसी दूसरी व्यवस्था पर निर्भरता कम रहे। शहर से लेकर गांव तक आक्सीजन प्लांट और आक्सीजन कंसंट्रेटर का भंडार किया गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आक्सीजन प्लांट की स्थापना भी पहली बार हुई है। पेश है आक्सीजन की उपलब्धता पर यह खास रिपोर्ट।

ये है नंबर गेम

1000 एलपीएम के दो नए आक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगे एसआरएन में

2000 लीटर के लिंडे कंपनी के दो टैंक पहले से हैं एसआरएन में

1200 एलपीएम का एक जेनरेशन प्लांट है काल्विन अस्पताल में

2200 एलपीएम का आक्सीजन जेनरेशन प्लांट लग रहा है बेली में

280 बड़े आक्सीजन सिलिंडर हैं एसआरएन में

140 छोटे सिलिंडर हैं एसआरएन में

195 बड़े आक्सीजन सिलिंडर हैं बेली अस्पताल में

125 छोटे आक्सीजन सिलिंडर हैं बेली अस्पताल में

100 बड़े आक्सीजन सिलिंडर हैं काल्विन अस्पताल में

20 छोटे आक्सीजन सिलिंडर हैं काल्विन अस्पताल में

1066 बेड एसआरएन में, सभी पर आक्सीजन की सुविधा

100 बेड का पीकू है एसआरएन में, सभी पर आक्सीजन की सुविधा

10 बेड वाले आक्सीजन युक्त चार सीएचसी तैयार हैं

वेंटिलेटर भी कम नहीं

230 वेंटिलेटर हैं एसआरएन अस्पताल में

42 वेंटिलेटर हैं बेली अस्पताल में

127 आक्सीजन कंसंट्रेटर हैं बेली अस्पताल में

10 आक्सीजन कंसंट्रेटर हैं एसआरएन में

सीएचसी में कंसंट्रेटर की तगड़ी व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सीएचसी कोटवा में 10 रामनगर में 12, मांडा में 25 और फूलपुर में 24 आक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध हैं।

कंसंट्रेटर बन सकता है लाइफलाइन

आक्सीजन कंसंट्रेटर एक ऐसा विद्युत संचालित हेल्थ उपकरण है जिसकी कीमत 40 से 45 हजार रुपये है। इसे अब तमाम कंपनियां आनलाइन उपलब्ध करा रही हैं। यह उपकरण वायुमंडल की आक्सीजन को खींचकर उसे पल भर में मेडिकल आक्सीजन में तब्दील कर देता है और मरीज को मास्क लगाकर वही आक्सीजन देते हुए जान सुरक्षित रखी जा सकती है। बस कुछ समय के अंतराल में उसमें पानी डालते रहने की आवश्यकता रहती है।

आक्सीजन अब है भरपूर

आक्सीजन की उपलब्धता अब भरपूर है। सभी कोविड अस्पतालों में बेड तक पाइपलाइन बिछ गई है। जेनरेशन प्लांट लग गए हैं। 166 टाइप बी सिलिंडर (जंबो) का आर्डर दे दिया है। आक्सीजन कंसंट्रेट भी 15 और मंगाए जा रहे हैं। यह सब इंतजाम इसलिए किए गए हैं ताकि कोरोना संक्रमण यदि आए भी तो आक्सीजन बिना किसी की जान न जाए।

डा. नानक सरन, मुख्य चिकित्साधिकारी प्रयागराज

Edited By: Ankur Tripathi