प्रयागराज, जेएनएन। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए पुलिस अफसरों ने सोमवार को एक और कदम उठाया है। चौराहों पर लगे रेड लाइट सिग्नल पर ब्रेक लगा दिया गया है। यहां फ्लैश और ब्रेकिंग पर ध्यान दिया जा रहा है। मसलन देखिए और जाइए की तर्ज पर व्यवस्था की गई है। प्रयागराज प्रदेश का पहला जिला है, जहां इस प्रकार की पहल हुई है। अफसरों के इस कदम को लोग सही ठहरा रहे हैं।

48 ट्रैफिक सिग्नल हैं शहर में 

शहर में बड़े और छोटे चौराहों पर 48 ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं। इसमें जानसेनगंज, सिविल लाइंस हनुमान मंदिर, लोकसेवा आयोग, महाराणा प्रताप, धोबी घाट, बिजली घर, ट्रैफिक लाइन, तेलियरगंज, चंद्रलोक, रामबाग, बैरहना, साउथ मलाका, बालसन चौराहा आदि शामिल हैं। जानसेनगंज, रामबाग, सिविल लाइंस हनुमान मंदिर, बिजली घर आदि चौराहों पर सड़कों की चौड़ाई कम है। यहां रेड लाइट सिग्नल डेढ़ से दो मिनट का रहता है। इस दौरान वाहनों की कतार लग जाती है। जल्दी निकलने की कोशिश में लोगों की इस कदर भीड़ लगती है कि फिजिकल डिस्टेंसिंग ध्वस्त हो जाती है। इसी में बिना मास्क वाले भी रहते हैं।


देखिए और आगे बढ़ जाइए

पान, गुटका और सुर्ती का सेवन करने वाले इधर-उधर गंदगी फैलाते हैं, जिससे कोरोना का संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता है। इसी को देखते हुए एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने अधिकारियों से विचार-विमर्श कर इस रेड लाइट सिग्नल पर ब्रेक लगा दिया है। चौराहों पर लगे सिग्नल पर फ्लैश और ब्रेकिंग की व्यवस्था कर दी गई है। यानि यलो (पीली) लाइट। इसका मतलब चौराहों पर देखिए और जाइए। रुकने की कोई जरूरत नहीं है। इसका मकसद लोग अब एक जगह एकत्र नहीं होंगे और संक्रमण फैलने का खतरा भी कम होगा।

छोटे चौराहों पर बंद हो गई लाइट

शहर के छोटे-छोटे चौराहों पर रेड लाइट को बंद कर दिया गया है। इसकी वजह यहां वाहनों का दबाव कम होना बताया जाता है। हालांकि, अधिकारियों की मानें तो यहां भी फ्लैश और ब्रेकिंग की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन कुछ समय बाद।

कप्तान का है यह कहना

कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए हर वह कदम उठाए जा रहे हैं, जो जनहित में उचित हैं। चौराहों पर लगे रेड लाइट सिग्नल को फ्लैश और ब्रेकिंग मोड में डाल दिया गया है, ताकि लोग चौराहों पर देखते हुए धीमी गति से अपने वाहन लेकर आगे बढ़ सकें। यहां रुकने की कोई जरूरत नहीं है। रेड लाइट सिग्नल होने पर भीड़ हो जाती थी, जिस कारण संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता था।

सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, एसएसपी