प्रयागराज, जेएनएन। प्रयागराज शहर में कीडगंज पुलिस ने बच्चा चोरी कर बेचने वाले गिरोह का मंगलवार को राजफाश किया तो पुरानी घटनाएं भी ताजा हो गईं। नौ माह के भीतर यह बच्चा चोरी की यह तीसरी घटना है। हालांकि, पुलिस ने तीनों ही वारदातों का राजफाश करते हुए आरोपितों को भी धर दबोचा है। वहीं बच्चा चोरी की बढ़ती घटनाओं ने शहर के लोगों को भयभीत जरूर कर दिया है। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि कुछ लोग अपने हित के लिए दूसरे के बच्चे को चोरी करवा रहे हैं।

संतान सुख और पुत्र की लालसा ने जुर्म की दहलीज पर पहुंचाया

कीडगंज के कृष्णा नगर के रहने वाले जनरल स्टोर की दुकान चलाने वाले सुनील सोनी और उसकी पत्नी मंजू के कोई संतान नहीं है। किसी ने दोनों को बताया कि कैंट थानांतर्गत सर्कुलर रोड की रहने वाली शोभा और शशिकला बच्चा मुहैया करा सकती हैं। दंपती ने इनसे संपर्क किया तो बताया गया कि वह आजमगढ़ जिले की रहने वाली हैं। दंपती ने लड़के की इच्छा जताई, जिस पर कहा गया कि जल्द ही उनको बच्चा उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन इसके लिए 50 हजार रुपये लगेंगे। शोभा और शशिकला ने आजमगढ़ जाकर बच्चा भी चोरी कर लिया, लेकिन मंगलवार शाम जब वे बच्चे को परेड मैदान पर दंपती को सौंप रहे थे, तभी कीडगंज इंस्पेक्टर रोशनलाल ने सभी को गिरफ्तार कर लिया।

पिछले वर्ष अक्टूबर में एक वर्ष की सना को किया था गायब

जानसेनगंज का रहने वाला ट्राली चालक रिजवान अपने परिवार के साथ रामबाग रेलवे स्टेशन के परिसर में तिरपाल डालकर रहता था। पिछले वर्ष 15 अक्टूबर की रात उसकी एक साल की पुत्री सना उर्फ शहनाज को चोरी कर लिया गया था। करीब नौ दिन बाद कीडगंज पुलिस और क्राइम ब्रांच ने बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया था। मामले में नईम अली उर्फ बब्बू, रामसूरत, जमीला को गिरफ्तार किया गया था। बच्ची को खरीदने वाले दंपती डा. रंजन गौतम और उनकी पत्नी वंदना निवासी ईब्लूएच आवास विकास कालोनी झूंसी को भी गिरफ्तार किया गया था। वंदना के देवर चितरंजन गौतम की पत्नी को बच्चे नहीं हो रहे थे, इसलिए जमीला से बात कर बच्ची लाने के बदले 60 हजार रुपये देने का वादा किया गया था।

रेलवे स्टेशन के बाहर से 20 दिन की बच्ची को उठा ले गए थे

मेजा क्षेत्र निवासी गोलू परिवार के साथ रेलवे जंक्शन के गेट नंबर तीन के पास तिरपाल डालकर रहता है। पिछले वर्ष नवंबर माह में उसकी पत्नी नेहा खाना बना रही थी। बगल में उसकी 20 दिन की पुत्री कुमकुम लेटी थी। इसी दौरान यहीं पर रहने वाला अंकित पहुंचा और बच्ची को उठा ले गया था। बाद में बच्ची को करेली क्षेत्र से बरामद कर छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बच्ची को 40 हजार रुपये में बेचा गया था। अंकित मूलत: सुल्तानपुर का रहने वाला था। रेलवे स्टेशन के बाहर वह करीब दस वर्ष से रह रहा है। कभी वह चाय तो कभी होटल में काम करने लगता था। रुपये नहीं होते थे तो अपना खून निकलवाकर बेच देता था। वह नशे का इंजेक्शन लेता था। चोरी छिनैती जैसे अपराधों में वह लिप्त था।

Edited By: Brijesh Srivastava