यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 09, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Chhath Puja 2021: व्रती महिलाएं आज मनाएंगी खरना, शुरू हो जाएगा 36 घंटे का निर्जला व्रत
पवित्रता बनाए रखने के लिए नया वस्त्र धारण करके गुड़ लौकी अथवा गुड़ चावल की खीर बनाकर छठी मइया का ...और पढ़ें

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। सुख, समृद्धि व संस्कार को समर्पित सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ की अनौपचारिक शुरुआत कार्तिक शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि से हो गई। छठ मइया की कृपा प्राप्ति के लिए व्रत रखने वाली महिलाओं ने सोमवार की सुबह गंगा, यमुना व संगम के पवित्र जल में स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। घर आकर दिनभर भजन-कीर्तन में लीन रहीं। सूर्यास्त के बाद पुन: स्नान किया। पवित्रता बनाए रखने के लिए नया वस्त्र धारण करके गुड़, लौकी अथवा गुड़, चावल की खीर बनाकर छठी मइया का ध्यान करके परिवार के सदस्यों के साथ ग्रहण किया। आज मंगलवार को खरना मनाया जा रहा है। यहीं से 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होगी।
ठेकुआ है खास प्रसाद
डाला छठ पूजा का सबसे खास प्रसाद ठेकुआ है। इसे गेहूं के आटे में देशी घी और चीनी मिलाकर बनाते हैं। इसी को खाकर व्रत का पारण किया जाता है।
सृष्टि चक्र का प्रतीक है डाला छठ
ज्योतिषाचार्य विद्याकांत पांडेय बताते हैं कि डाला छठ पर्व सृष्टि चक्र का प्रतीक है। मनुष्य के जीवन में उदय व अस्त दोनों अनिवार्य है। डाला छठ का पर्व हमें सिखाता है कि बच्चे के जन्म पर जैसे उत्सव मनाते हैं। ठीक उसी प्रकार मृत्यु को गले लगाना चाहिए। हर अस्त में उदय छिपा है, हर मृत्यु में नवजीवन। उत्थान और पतन दोनों को समान सम्मान दोना चाहिए, क्योंकि पतन ही उत्थान का मार्ग प्रशस्त करेगा। शास्त्रों ने उगते और डूबते सूर्य दोनों को महत्व दिया है। यह व्रत इंद्रियों पर नियंत्रण सिखाता है। ज्योतिष के अनुसार कुंडली में ग्रह दोष होने पर सूर्य को अर्घ्य देने से भाग्योदय की प्राप्ति होती है।
व्रती लोगों के भाव
- डाला छठ व्रत का अबकी मेरा 25वां साल है। व्रत रखने से आत्मीय संतुष्टि मिलती है। मइया ने मुझे सुख-समृद्धि की प्राप्ति कराई है।
निर्मला देवी
अबकी मेरा पहला व्रत है, जिसे लेकर काफी उत्साहित हूं। छठी मइया से मेरा बचपन से जुड़ाव है। मइया की स्तुति करके उनकी कृपा प्राप्ति की कामना करुंगी।
वंदना
सौभाग्यशाली हूं कि छठी मइया मुझसे व्रत रखवा रही हैं। मुझे इस व्रत का सालभर प्रतीक्षा रहती है। व्रत रखकर पूजन करने से आंतरिक संतुष्टि मिलती है।
सविता सिंह
मैं बचपन से छठ व्रत का विधान देख रही हूं। विवाह के बाद मुझे व्रत रखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। तन व मन मइया की भक्ति में अभी से रम गया है।
भारती सिंह
मैं कई साल से छठ मइया का व्रत रखता हूं। यम-नियम से उनकी स्तुति करने से आंतरिक ऊर्जा मिलती है। उस अनुभूति को व्यक्त नहीं कर सकता।
कृष्णानंद तिवारी
मान्यता है कि डाला छठ का व्रत सिर्फ महिलाएं रखती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। मैं भी पूरे भाव से व्रत रखकर मइया का पूजन करता हूं।
-जगदेवानंद दुबे
